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Showing posts from January, 2020

सवाल-जवाब

"इतने सवाल मत पूछो तुम!" "क्यों?" "इस पर भी क्यों? बोला न! बस मत पूछो! हर क्यों का जवाब नहीं है!" "ये क्या बात हुई भला!! तुम्हे  जवाब नहीं आता, इसलिए मैं सवाल न पूछूँ?"  हाँ! मत पूछो! मेरे हर सवाल का जवाब बनी रहो! 

तुम, मैं, और पंज-पाइपर!

"कँहा जा रही हो तुम?" "पंजाब" "देखना!! किसी पंजाबी मुंडे दे नाल भाग मत जाना!" "अरे! इरादा तो वही था! तुम्हे कैसे पता चल गया? जिगरी हो तुम सच्ची!" "तुम्हारे रग रग से वाकिफ़ हूँ मै बंगालन!!" "अच्छा टाइटल है वैसे.. बंगालन भागी पंजाबी के साथ!! नही? " "हाँ हाँ क्यों नहीं? करो फिर ऐसा ही कुछ! बहुत मज़ा आएगा! क्या स्कैंडल होगा! वाह वाह!!"  "फिर खूब जमेगा रंग जब मिल बैठेंगे तीन यार - तुम, मैं, और पंज-पाइपर!!" 

कितने धान से कितना चावल बनता है आख़िर ?

"तूम आसपास आते ही मिस्ड कॉल दे देना।"  "क्यों?"  "मैं नीचे आ जाऊंगी!"  "फूल माला लेकर?"  "हाँ हाँ! क्यों नहीं ? सिंदूर भी साथ लाऊं ? टीका करने?" "ज़रूर!" "और साथ में  चावल लाऊँ के  धान? गीले सिंदूर के ऊपर लगाऊँ? के थाली में रखना है? कुछ एक तो करना होता है ना?"  "धान ही  ले आओ! चावल बाद में बन जाएंगे।"   "हाँ यार!  सही है!  लगे हाथ कितने धान से कितना चावल बनता है, पता भी चल जाएगा*!"   *बांग्ला में एक कहावत है "कतो धाने कतो चाल होय!" जिससे ये समझाया जाता है के आप काम शुरू करो तो कठिनाई पता चलती जाती है।  

अपनी-अपनी श्रद्धा है

"हम बेकार मे टिकट तो नही ले रहे? 5 ही बजे तक खुला रहता हो तो?" "अरे! मैं बोल रही हूँ ना, सन-सेट तक का टाइम है! चलो टिकट लेते हैं।" टिकट के लाइन में पीछे से, "भाईसा'ब! ये सुंदर नर्सरी कब तक खुला रहेगा?" पूरे शिद्दत के साथ पीछे घूमकर:  "देखिए भाईसाब! मुझे तो पता नहीं पर ये बोल रहीं हैं के अभी काफी टाइम है। और मैं इन पर भरोसा कर रहा हूँ। आप अपनी देख लो। आख़िर में सब अपनी-अपनी श्रद्धा है!"

खाना बनेगा के बातें?

"तुम ऐसे नाचकर दिखाती तो कितना मज़ा आता! सिर्फ़ लफ़्फ़ाज़ी क्यों हो आखिर?" 'बस! सब मुझसे ही करा लो! मुझे अपना entertainment चैनल बना लो तुम!" "बनोगी?" "तुम्हे Entertainment टैक्स भरना होगा!"  "रहने दो फिर। जाओ! रात हो गई है। कुछ खा लो।" "बनाना पड़ेगा।" "नहीं बना अभी?" "नहीं! अभी तो बातें ही बना रही थी !" "भूखी रहो फिर!!' "टैक्स मिलता तो swiggy पर ऑर्डर कर देती। पर तुम माने नहीं!  हाय! हाय!!  ये  ज़ालिम दुनिया  और एक बिचारी औरत!  "

ड्रामेबाज़ी

"सॉरीईईई!!! मुआफ़ी!" "ड्रामेबाज़ हो तुम!"  "तुमसे कम!" "इसमें भी?"  "क्या मतलब?"  "सब कुछ में पीछे ही रहते हो!! आगे बढ़ो!  कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत* का भरम रख!"  " उफ़!  ड्रामेबाज़ हो तुम!!"   *पिंदार-ए-मोहब्बत: Pride of love

चोर का इमोशन होता है, पर चुड़ैल का?

"अब मान भी लो!"  "क्या?"  "ये काम तुम्हारा ही है न?" "कौन सा?" "ये फ़ोन गायब होना?" "अरे! मै दूसरे शहर में हूँ! मेरा काम कैसे होगा?"  "सच बताओ!" "नहीं भाई! मानती हूँ के मुझे ही फ़ोन न करो तो फ़ोन की तुम्हे ज़रुरत क्या है, ऐसा लगा था मुझे......"  "वही तो!  अब छुपाओ मत! राज़ खुल गया! ये सब वही है।  तंतर मंतर जादू टोना! अब तो साबित  ही हो गया के तुम ही वो बंगाली चुड़ैल हो जिससे हम बिचारे हिंदी प्रदेश के लोग सदियों से डरते आये है!"  "सदियों से?" "हाँ! हाँ! सदियों से!"  "अच्छा! और ये नहीं सीखाया गया हिंदी प्रदेश के लोगों को के अंधे को अंधा, बहरे को बहरा , चुड़ैल को चुड़ैल नहीं बोलते?"  "नाह! हमे सिर्फ सिखाया गया है के चोर को चोर नहीं, चौकीदार बोलते है! चोर का भी इमोशन होता है आखिर!!" 

सुस्त सी नज़्म

" एक सुस्त सा खयाल आया है!"  "सुनाओ"  "सुस्त उँगलियों से कुछ सुस्त सी नज़्म लिख दूँ तुम्हारे जिस्म पर!"  "अब तक लिखा है तुमने  नज़्म कोई?"  Image Courtesy: Goog l e "लिखूंगा! पहले पढ़ तो लूँ.... जिस दिन हरफ़ दर हरफ़ पढ़ लूंगा तुम्हे, हर हरफ़ को छू कर जैसे मेज़ पर रखा ब्रेल में बना नक़्शा हो  कोई इस शहर का! उस दिन लिख लूंगा कोई जादुई नज़्म!" "और तब तक?"  "तब तक कोशिशें जारी-ओ-सारी रहेंगी!"