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तू कौन मैं खामखा!

  "जल्दी से गाड़ी में बैठो! रस्ते में खड़े क्यों हो?" "अरे मैं अमरूद भूल गया।"   "अब रहने दो! वापस तो जा नहीं सकते!" "अरे नहीं! ये तो बहुत ही बुरा है ।  मुझे अमरूद खाना था।" "उफ्फ! बच्चे मत बनो।  कोई मर नहीं रहा बिना अमरूद के।"   "तुम्हें क्या पता? कोई मर जाये तो?"   "अरे छोडो भी अब।" "कैसे छोड़ूँ? अरे अरे!! वो देखो फल का ठेला वहां है।  भैय्या, गाड़ी रोकिये!  मुझे अमरूद लेना है।" "नहीं! नहीं! बिलकुल गाड़ी मत रोकिये, भैय्या! मुझे जल्दी पहुंचना है।  मीटिंग है। हम घर पहुँच जाये तो फिर तुम निकल जाना आम, अमरूद कुछ भी लेने। " "हे राम! ये औरत तो मुझे अमरुद भी नहीं दिला रही है! कितनी ज़ालिम है! भैय्या, अब आप रोक दीजिये बस गाड़ी!"  "अब क्यों? ठेला वाला तो गया।" "अब मैं जमीन में लेट जायूँगा, पैर पटकूंगा, और अपने ऊपर मिट्टी डाल लूंगा!! सब को बताऊंगा ये तो मुझे अमरुद भी नहीं दिलाती है!" "हममम ... रोक ही दीजिये भैय्या गाड़ी फिर! लेकिन १ मिनट के लिए। इसे उतारकर तुरंत भाग जायेंगे - फिर...

निकम्मा फेसबुक!

"अरे तुम्हें  पता है माँ काफी गुस्से में थी आज!"  "क्यों?" "बोली ,कि मैं दिखती नहीं हूँ फेसबुक पर उन्हें। उनसे छुपाकर काम करती रहती हूँ अपना।"   "तो तुमने क्या बोला?" "मन तो हुआ पूछूं कि 'देखना क्या है?' फिर भी समझाने की कोशिश की, कि मेरे पोस्ट्स देखने के लिए उन्हें लाइक करते रहना होगा।" "तो?" "बस गुस्सा हो गईं! बोलीं, 'पसंद न आये तब भी? काम तुम्हारे पसंद करने लायक होते तो है नहीं! लाइक किस बात का दूँ?'" "अब कौन उनको एलगोरिदम  समझाए!" "वही तो! उनकी शिकायत  ये है कि फेसबुक हमारे छोटे शहर के पडोसी की तरह क्यों नहीं बन जाता?" "कैसे?" "तुम चाहे कितना भी अनदेखा करो अपनी लड़की को, वो आ कर बताकर जाएंगे, 'आज देखा आपकी लड़की को वहां पुराना किला के पीछे सेल्फ़ी खींच रही थी किसी अधेड़ उम्र के आदमी के साथ! और फिर तो कुछ हद्द ही हो गई! मैंने देखा कि  कोई छोटे से लड़के के साथ  गले में हाथ डाले घूम रही है सुन्दर नर्सरी में। कितना हस हस कर बातें कर रहे थे दोनों - क्या बताऊँ मैं आपको!...

ख़ुश रहो! आबाद रहो!

"ये हमारा अपार्टमेंट है न - हमारी काम-वाली दीदी बोलती है ये बनते हुए एक इंसान मर गया था! और वो  बगल वाले में भी! बोलते है दोनों को रातों रात इमारत के नीचे गाड़ दिया।" "अच्छा? फिर?"  "हाँ! फिर उनके कपड़े छुपा दिए, झोपड़ी खाली कर दिया। ढाई तीन महीना बाद घरवाले पूछने आए तो बोले, "वो तो पिछले महीने यहां से छुट्टी करके गाँव को निकला था ! पंहुचा नहीं अभी?" "हाय हाय!! डराओ मत! " "बोलते हैं, घर बनाते हुए कोई न कोई ढेर होता है।  हर घर के नीचे किसी न किसी की लाश मिलती है।" "हम्म्म .. " "एक आधा  घर के नीचे शायद मेरा भी है!" "क्या अनाब सनाब बोलती हो तुम भी! गुस्सा करूँ?"  "नहीं करो।  सुनो बस। मेरी लाश पर बना घर भी होगा दुनिया में। अच्छा एक बात बताओ! घर तो बड़ा सुन्दर दिखता है , लाश को जाकर अगर घर की सुंदरता के बारे में बताएं  तो लाश को कैसा लगेगा ?" "बोला था डराओ मत! अभी फ़ोन बंद हो जाएगा! तब पता चलेगा तुम्हें! "  " धमकी?" "और नहीं तो? देखो! तुम लाश छोड़ो! घर छोड़ो! तुम सुन्दर कितनी  हो...

चुड़ैल की झाड़ू!

"आज सुबह सुबह ही रो ली"  "उफ़! इसलिए ऐसी आंखे है!! क्यों भाई?" "अरे मेरा जो घाव है न आते जाते दस बार छू जाता है दिन में और खून रिसता है दिन भर!"   "तो छूती क्यों हो तुम उसे?"  "भरा के नहीं देखना नहीं होगा?"  "नहीं नहीं! तुम्हे देखने की क्या ज़रुरत? बस! बैंडेज बदलवा लिया करो वो इंजेक्शन ट्रे वाले नर्स से शनिवार! छूओ मत! गुज़रो भी मत उधर से!"  "ठीक बोला! सोचती हूँ शहर ही छोड़ दूँ! इसकी गलियां छू देती है!" "कहाँ जाएगी? ए जोड़ीदार! वहाँ कौन है तेरा?"  "कोई भी मेरी राह न देखें! आँख बिछाए न कोई!!" "तो फिर?" "पर भूल न गए वो! और मुझे भी भुलाने की ज़रुरत नहीं! ये अच्छी बात है के नहीं?"  "अच्छा! ये तो बताओ दुखता कहाँ है?' "दिल में " "तो जोड़ीदार मेरे! दिल यहीं छोड़ जाना!" "अरे क्या बात करती हो! सुबह सुबह चढ़ा ली?" "तो बेकार का जाना है जानेमन! जहाँ जाओ, तेरा पीछा न ये छोड़ेगा सोणिये! भेज दे चाहे जेल में!!" "उफ़्फ़! कुछ भी रास्ता मत छोड़ो मेरे लिए! ...

एक पंथ दो काज!

 "अच्छा सुनो! एक हार दिखाना था..." "दिखाओ" "ये लो!"  "ये तो साड़ी है!"  "अरे हार भी है देखो तो!" "ओह ये हार है? ऐसा तो पायल होता है!" "इतना चौड़ा? साफ़ दिख रहा है हार है! " "अरे दो  पायल  रख दो एक साथ! हो गया बस।"   "कुछ भी बोल दो बस! अच्छा है के नहीं बताओ।"   "अच्छा तो है।  कितने का है?" "अब कीमत तो देखो कुछ  ज़्यादा ही है! !"  "अरे राम राम! मत खरीदो! मेरे मम्मी के पास बिलकुल ऐसे वाले है.... पायल।"   "तुम्हारे मम्मी के पास है तो मैं क्या करूँ? चोरी करके लाओगे मेरे लिए?" "हाँ लाता हूँ! अगली बार। पक्का!"  "कब जाओगे फिर घर?" "जल्दी है तुम्हे?" "हाँ एक पंथ दो काज! मुझे हार मिल जायेगा और तुम जेल चले जाओगे। तो ये बकवास भी नहीं सुनना पड़ेगा।  आजकल कोविड का टाइम है, मिलने नहीं देते!" "अरे ऐसे नहीं बच सकती तुम! ई-मुलाकात जारी है!" "हे राम!!"

जात न पूछो फेमिनिस्ट की!

"सुनो! तुम अजीब तरीके से सोते हो!  जला हुआ हाथ ढक कर सोना!" "पक्का?! हाथ  धो कर नहीं?"  "धोना क्यों है? रुई से साफ़ कर लो और बैंडेज से ढक लो!" "या ख़ुदा!! क्या करे इस औरत का! इसने तो ह्यूमर बेच कर फिश-फ्राई खा लिया लगता है! "  "याददाश्त  बेचकर पेप्सी पी* थी  और  अब ह्यूमर बेच कर फिश फ्राई?"  "अब ऐसा ही है तुम्हारा तो! जाने कब क्या कर लो!" "देखो! मैं दिलवाली हूँ।  सेल पर बेस्ट चीज़े चढाती हूँ।   याददाश्त  बेचना पड़े तो मेरी !  और ह्यूमर बेचना पड़ा तो तुम्हारा!"   "अच्छा?" "और नहीं तो? ईमान-धरम भी कोई चीज़ है! अब तुम्हारी  याददाश्त   बेचते हुए, 'ले लो! ले लो! ऐसी याददाश्त कहीं नहीं मिलेगी!   ऑफर में है!  ले लो! ' ऐसा  तो  नहीं बोल सकती न!" "ओह हो! क्या सही जा रही हो।  पर लगता है, सही  बनिया  नहीं  बन पाई तुम जात से!"  "देखिये! जात पर मत जाइये! हम रेसिस्म से सख़्त परहेज़ करते है!" "आह! जात न पूछो फेमिनिस्ट की, मत भू...

रशियन नॉवेल जैसी ज़िन्दगी!

"सुनो! आज एक  बहुत अच्छी बात हुई! शांति का एडमिशन हो गया!!" "अब ये शांति कौन है?!" "अरे रे! तुम भी यार! कुछ भी नहीं याद रहता!" "देखो! एक तो तुम अचानक नया किरदार ले धमकती हो!  और साथ में एक धमाकेदार बात भी जोड़ देती हो।" "कैसे?" "जैसे, सफी चाँद पर चला गया! अब कौन सफी? किस दिन का चाँद? चला क्यों गया?! री -एंट्री भी एक इंट्रो के साथ होता है भाई! ये नहीं के बस यूँ ही आ धमके!" "हमममम!! मैंने माना के मेरी ज़िन्दगी कुछ कुछ रशियन-नॉवेल जैसा है! कुछ ज्यादा ही किरदार है इसमें। पर तुम ये तो मानोगे के कहानी बहुत दिलचस्प है?" "उफ़्फ़!" "और अब तुम भी इसी कहानी का हिस्सा हो,  तो   आदत डाल लो! फोटो देखोगे  उसका ?" "बिना दिखाए तुम कहाँ मानोगी?" "मान तो मैं जाउंगी, पर तुम्हारे लिए ठीक नहीं है !" "ऐसा क्यों?" "बोलते है,  दृश्य से जुड़ने से यादें पक्के हो जाती है।  तुम्हारी याददाश्त  का हाल देख ही रहे हो!   फोटो बेहद ज़रूरी है!" "कुछ भी  बोलो अब त...

एवरेज-सी-हाज़िर-जवाबी!

"अर्ज़ किया है....  लबो-गुलाब के हम नहीं क़ायल*, जब तक न पुकारे नाम मेरा या कोई छाप न छोड़ जाए जिस्म पर मेरे!" "क्या बात करते हो!! नहीं नहीं! तुम्हारे लबो-गुलाब के क़ायल तो हम हर पल है!"  "सुना है एक नयी मशीन आने वाली है! लबो-गुलाब* की फोटोकॉपी करने के लिए! तुम्हारा प्रॉब्लम जल्दी ख़तम हो जायेगा!"  "अरे वाह! असली मुझे भेज देना।  फोटोकॉपी तुम रख लेना! काम चल जायेगा तुम्हारा!"  "हाहाहाहाहा!! इसी हाज़िर-जवाबी पर तो मरते है जानेमन!"  "बस?" "हाँ! और क्या?  बाकि  तो   सब एवरेज ही है तुम में!!"  "अच्छा?!"  "हाज़िर-जवाबी ही है बस!  और  शुक्र करो वो है!  वो न होता तो तुम नज़र भी नहीं आती!" " आय हाय! सच में?" " एकदम!  तुम्हारा पूरा तारुफ़* बताऊं तो, 'एवरेज-सी-हर-फन-मौला*-हाज़िर-जवाब-वाली! इनकी कोई शाखा नहीं है!!' " "हममम... और तुम बद्तमीज़  हो! कभी मैंने टैटू करवाया इसका, तो जान लेना तुम्हारा ही नाम लिखवाया है!"  "सही है! टैटू करवा ही ...

दिल, दोस्ती, और हम!

"क्यूट!"  "कौन?" "ये लड़का! जिसका फोटो भेजा तुमने।"  "अच्छा?!" "हाँ यार! कौन है ये? बताओ तो इसके बारे में!"  "अरे नहीं बता सकती! टॉप सीक्रेट है !! " "क्या यार!! मुझे भी नहीं बता सकती?" "हाँ! तुम ना फोटो डिलीट कर देना।  उसे अच्छा नहीं लगेगा कि मैंने ऐसे ही शेयर कर लिया किसी के साथ!"   "क्या बात कर रही हो? ऐसा तो बिल्कुल नहीं लगा फोटो में! यहां तो काफी ब्रॉड माइंडेड लग रहा है!  मेरी बात तो करवाओ उससे तुम!" "अरे अरे!! तुम भी न! भोले हो बहुत, इसलिए कन्फ्यूज् हो गए! ब्रॉड फोर-हेड से ब्रॉड-माइंडेड होने का कोई   ताल्लुक़  नहीं!"  "हा हा हा हा हा हा!! (वैसे देख रहा हूँ मैं सब! बस मौका मिलना चाहिए तुम्हे मेरे फोर-हेड पर तंज कसने का!)  खैर ये तो बताओ ओपन-माइंडेड है या नहीं?"  "अब उसके तो लेवल्स है न! काफी मूडी टाइप है। कभी अच्छे मूड में हुआ तो मर्दों से बातचीत में दिलचस्पी है के नहीं पूछ कर देखती हूँ।"  "मूडी है!? फिर तो रहने दो! फोटो में तो दिलचस्प लग...

कुछ इश्क़! कुछ काम!

"सोच रहा हूँ बाल और छोटे करवा लूँ!" "क्यों? अभी तो बोल रहे थे बढ़ाना है।"    "सोचा तो था, पर बढ़ेगा नहीं! समझ आ गया मुझे! तो एकदम छोटे करवा लेता हूँ। क्रू कट! क्या बोलती हो ?"  "करवा लो! घर की खेती है।"   "तू म  भी करवा लो।"   "अरे! अब मैं क्यों कराऊँ?"  "क्यूट लगोगी!" "अच्छा?!" "हाँ यार! वैसे तो कभी लगती नहीं हो।  बाल छोटे करा के देख लो! शायद बात बन जाये!" "क्या बोला!! हमममम .... . आप को ठीक दो मिनट का टाइम दिया जाता है इस वाक्य को दुबारा सोचकर बोलने के लिए ! Or this will be forever held against you in the court of ....." "अरे अरे! तुम भी न बेकार में भड़कती हो!  मैं  तो ये  बोल रहा था, इतना ज्यादा क्यूट लगना दुनिया के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए बाल छोटे करवा लो। क्यूटनेस कम हो जाये थोड़ा, तो दुनिया-वाले काम भी कर लें !" "अब ठीक है! "

लजीज़ और खुश-ज़ायका!

"कल जब हम मिले तुम  बहुत ही cute लग रही थी!" "जब मिले तब? बाद में नहीं?" "हाँ यार! बस दो चार सेकंड के लिए! बाद में तो नॉर्मल हो गयी!" "वाह वाह! बड़प्पन देखो तुम्हारा! दो चार सेकंड याद भी रखा और बोल भी रहे हो!"  "वो तो  मेरा दिल है ही थोड़ा बड़ा! पर अभी मैं ऑफिस कॉल में हूँ! तुम party- return!! मुझे तंग मत करो!" "तुम ऐसे लेटे लेटे ऑफिस का कॉल कर रहे हो?" "हाँ पियक्कड़!!" "अरे बहुत शोर है यार बारापुला के रस्ते में! तुम मुझे प्रिये बोल रहे हो और  मुझे पियक्कड़ सुनाई दे रहा है!" "मैं पियक्कड़ ही बोल रहा हूँ!" "बताओ! जनाब लुढ़क रहे है! फैले हुए हैं! काम भी किसी तरह लेटे लेटे हो रहा है! और मुझ पर ये सब इल्जाम!"  "अब क्या करें! अंदर तक जकड लिया है तुमने! जड़ें और फैले, इसलिए फैला हुआ हूँ मैं! बस इसीलिए लुढ़का हुआ-सा दिखता हूँ!"  "वैसे हमने  साल भर पहले सोचा था ये जड़ों का  फैलना, रगों में दौड़ना कुछ ही समय के लिए होता है! फिर दुनिया-दारी! रस्मों-रिवाज़!"   ...

बस आ ही रहा था मैं!

"ये उस दिन लिखा था जिस दिन झगड़ा हुआ था, झरना और हौज़-ए-शम्सी को लेकर!"  Mehrauli Jharna 
 "अच्छा?! उस पर क्यों?" 
"याद नहीं?"  
"एक तो तुम झगड़ा इतना करती हो यार! याद ही नहीं रहता झगड़ा किस बात पर हुआ था!"  
 "अच्छा!? मै झगड़ा करती हूँ? वो भी इतना के वजह ही याद नहीं होता आली जनाब को?"  
"अरे! सुनो तो! मैंने कहा, झगड़ा इतना होता है कि, यह वाला किस बात पर हुआ याद नहीं!" 
"उसके पहले ये भी बोला कि तुम करती हो! मैं सब ध्यान से सुनती हूँ!" 
"एक तो तुम सुनती इतना क्यों हो और याद भी इतना कैसे रख लेती हो यह भी मुझे समझ नहीं आता !" 
"मजबूरी है! क्या करे? वरना तुम्हारा क्या भरोसा! तुम तो झरना को हौज़-ए-शम्सी कह दो और अपने सारे शुरू किए हुए झगड़े मेरे मत्थे मढ़ दो!" 
"अब देखो! तुम अलग-अलग बातों को मत मिलाओ! झरना कभी भी हौज़-ए-शम्सी नहीं हो सकता,ये तो सही है, लेकिन दूसरे वाले बात की possibility आधी तो है ही न!" 
"हम्म...... वैसे झगड़े भले ही आधे मैं शुरू करूँ, ख़त्म सारे मैं ही कर...

तुग़लक़ी चुड़ैल

'तुम्हे वो चुड़ैल के नए कारनामों के बारे में बताया?' 'कौन सी चुड़ैल? दिल्ली वाली? बंगालन? ठीक है वो?' 'हाँ यार! वही दिल्ली-वाली-बंगालन चुड़ैल !! ठीक तो कुछ ज्यादा ही रहती है, भला उसे क्या होगा! ... पर बड़े ही  तुग़लक़ी अंदाज़ है उसके!' 'तुग़लक़ी अंदाज़ ?! वाह! .... कैसे?' 'हाँ! देखो न अब.... कुछ ही  दिन पहले की बात है , मैंने कहा, "तुम आराम कर लो। इतनी दूर मुझसे मिलने आने की क्या ज़रूरत है? तुम थकी होगी। तुम्हे खामखा तकलीफ होगी " तो बस पीछे ही पड़ गयी! बोली, "तुम्हे कोई problem होगा अगर मैं तुमसे मिलने आऊँ तो?" अब तुम ही बताओ इस बात में  भला मेरी problem की बात कहाँ से आ गई ?' 'फिर?' 'मैंने कहा, "अरे नहीं! मेरी problem की नही, तुम्हारी तकलीफ की बात हो रही है!" 'अच्छा ! तो?' 'बोली, " वो तो ठीक है, पर इस पर बात हो क्यों रही है? मैने तुम्हे कहा की मुझे कोई तकलीफ  होगी?" ' 'ये तो सही पूछा । कहा था उसने के तकलीफ होगी?' 'अरे तुम भी न। आदमी की समझ-बुझ भी कोई चीज़ ह...

लॉजिक की देवी और उनके भक्त

"कल तुम कितने बजे आ रहे हो?" "सुबह के पांच बजे । " "मैं आऊं एयरपोर्ट पर ?" "नही ! पागल हो तुम! " "अच्छा!? वैसे सच बताओ एयरपोर्ट के बाहर मैं मिली तो बहुत ज्यादा हैरानी होगी तुम्हे?" "तुम ना नही आ रही हो। ओके?" "हमम! वैसे तुम्हे पता है न ऐसे मुझसे बात करना खतरे से खाली नहीं है? " "अरे यार! मत आना प्लीज!! ऐसे बोलने पर चलेगा? " "अरे ये तो बताओ बहुत हैरानी होगी अगर मैं दिख गई बाहर?" "नहीं यार! तुम्हारा क्या ! तुम तो कुछ भी कर सकती हो!!" "अब  ठीक है! बिल्कुल ठीक! मुझे तो शक़ हो रहा था इतने समय में जाना भी है ठीक से मुझे, के नहीं!! " "चलो अब तो clear हो गया न? कोई challenge नहीं कर रहा तुम्हे।  मत आना तुम प्लीज।" "क्यों? कोई और होगी तुम्हारे साथ? " "हाँ! अब सही समझी। कितना देर लगाती हो!" "अरे वाह! फिर तो ज़रूर आती हूं और रेटिंग्स भी देती हूं। दस में से सही रहेगा?" "नही नहीं!  रेटिंग नही चाहिए! कोई रेटिंग क...

हर गुलाबी , गुलाबी नही होता!

"अच्छा ये साड़ी देखो!" "हमममम....." "ओके! हमममम है। उमममम नही।" "हां यार । क्या बताऊँ , गुलाबी मुझे पसंद नही!"  "अच्छा?! और ये साड़ी का क्या? पिछले साल तो बहुत ही पसंद आई थी ये! " "ये? ये तो बहुत ही अच्छी है यार!  तुम भी कमाल करती हो! अब हर गुलाबी , गुलाबी थोड़े ही न होता है!! " "तो गुलाबी पसंद नही मतलब क्या? कैसा गुलाबी? पिंक नहीं पसंद, के मैजंटा? पॉवडर पिंक?  फ्यूशिया पसंद है? या फ्यूशिया ही वो गुलाबी है जो तुम्हे पसंद नही?" "अरे बाप रे! ये सब क्या है?" "सब गुलाबी है! " "मुआफ़ करो!! बख्श दो! गुलाबी पसंद है मुझे!"

जग लाल लाल दिखे है मुझको!

"तुम लोगों ने लाल पहना है? पिटोगे तुम सब!" "क्यों ?"  "अरे Valentine's day पर लाल पहनना मना होता है।"  "कौन मना करता है ?" "अरे वही! नारंगी-पसंद लोग!" "तुमने भी तो पहना है!" "मेरा चेक डिज़ाइन वाला है।  तुम लोगों को देखो, पूरा का पूरा लाल! जैसे  साक्षात बग़ावत की मूर्तियां!" "अरे नहीं तुम भी फँसोगी! हमारे साथ जो खड़ी हो!" "ओह! वैसे भी मेरा डिफेन्स तैयार है! उन्हें देखते ही मै "वंदे मातरम" कहूंगी! " "और मैं ... भारत माता की जय!!" "अरे अब मैं क्या बोलूं?! गुड आईडिया! मैं "जन गण मन" गाना शुरू कर दूंगी! सब मारपीट बंद!  अब  कोई देशद्रोही थोड़े ही  न  होगा उन में!!"

बस यही एक बुरी बात!

"सुनो, कोई अच्छा सा डिज़ाइन सुझाओ। " "क्यों?" "सोच रहा हूँ, tattoo बनवा लूँ।" "ये अजीबो-गरीब ख़याल क्यों?" "अरे cool लगता है काफी! सोच रहा हूँ cool बना जाए!"  "अच्छा?! कुछ लिखवाना है के डिज़ाइन चाहिए?" "नही नही! लिखना कुछ नही है। नही तो तुम अपना नाम लिखवाने बोलोगी!" From Google "उफ़्फ़! ऐसा तो मैंने सोचा भी नही! " "बच गया!! नही तो सैफ़ ने सबका बेडा गर्क कर रखा है!! वैसे छोटा सा कोई डिज़ाइन बताना।" "क्यों?" "सुना है बहुत दर्द होता है। सच है क्या?" "सुना तो है!" "ओह हो!  चलो तुम भी  साथ।  बना लो तुम भी कोई डिज़ाइन!" "अरे! मैं क्यों?" "दर्द होगा न... तो दोनो साथ रहेंगे!" "अच्छा?!  तुम तो मर्द हो! सैफ़ जैसे। फिल्मों में सुना है मर्द को दर्द नही होता।" "हममम..."  "और वैसे  भी,  जनाब को cool बनना था। मुझे नही।" "बस यही एक ख़राबी है तुम में!...

नंबर वन चॉइस!

"बाथरूम पूरा बनवाना था यार!" "क्यों? पैसा ज्यादा हो गया है?"  "हाँ!" "अच्छा! फिर तो बनता है!" "है न? तो मैंने एक मिस्त्री को बुलाया था।   अब पता कैसे करुँ सही पैसे बताया के नहीं ?"  "कल क्यों नहीं बो ला  मुझे?"  "क्या करते?" "देख लेता एक बार आ कर!" "अच्छा! फिर तुम एस्टीमेट देते?" "अरे नहीं मुझे इसके बारे मे कुछ भी नहीं पता!" "फिर तो अच्छा किया नहीं बताया!"  "हाँ! सही बोला!"  "वैसे भी ये मिस्त्री मेरा नंबर वन चॉइस है! तो करवा ही लेती हूँ इससे!" "करवा लो!  पर बोला अब के बिलकुल गलत!! तुम्हारा नंबर वन चॉइस मैं हूँ!" "उफ़! तुम  भी  ना..... क्या बताऊं अब मैं ... लाखों में एक हो!" "बस लाखों में!!?" 

काली के चार हाथ!

"ये तुम्हारा इस फोटो में हाथ बांधकर खड़े होना थोड़ा अजीब है!"  "कैसे?"  "अरे पीछे वाली को देखो हाथ ऊपर है उसके सामने तुम खड़ी हो ! मूड ही बदल दिया उसका!"  "ओह हो! तुम ही मुझे काली बोलते हो न? तो ऐसे सोचो के मैं काली हूँ! दो हाथ डिफेन्स मुद्रा में, दो हाथ ऑफेन्स मुद्रा में ! अब ठीक है?"  "हाँ! अब ठीक है! पर जुबां तो बाहर निकाल लेती तुम, सही इंटरप्रिटेशन में मदद के लिए!"  "कैसे निकालती? पैरों तले तुम जो नहीं थे!"  "अरे उस विजुअल की ज़रूरत ही क्या है? वो तो सर्वजन-विदित है! परम सत्य है!" "उफ़!"

दुआओं का हिसाब किताब

"मुझे सौ रुपया दे देना! " "क्यों भला?"  "आज दरगाह में धागा बाँधा था। तुम्हारे लिए! " "अच्छा!! मेरे लिये बाँधा?" "हाँ यार! उतने ही पैसे थे। फिर भी!"  "वाह! क्या मांगा?" "ऐसा हो के मैं  हमेशा  तुम्हे ओढ़ू, तुम्हे बिछाऊं,  तुम पर छप जाऊं, तुम में खोऊं और तुम  ही में पायी जाऊं। हमेशा!!" "बढ़िया! वैसे ये दुआ मेरे लिए कैसे  था?" "और नहीं तो? ऐसा नही हुआ तो सोचो तुम्हारा क्या होगा!  दिल कितना बड़ा है मेरा!" "सच मे! ये तो सोचा ही नहीं!  मानना पड़ेगा!! बहुत ही बड़ा दिल है  तुम्हारा ! " "फिर नहीं तो?!  बस  पैसे दे देना तुम। " "ज़रूर!! सूद समेत! "