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Showing posts with the label Roads of Delhi

लजीज़ और खुश-ज़ायका!

"कल जब हम मिले तुम  बहुत ही cute लग रही थी!" "जब मिले तब? बाद में नहीं?" "हाँ यार! बस दो चार सेकंड के लिए! बाद में तो नॉर्मल हो गयी!" "वाह वाह! बड़प्पन देखो तुम्हारा! दो चार सेकंड याद भी रखा और बोल भी रहे हो!"  "वो तो  मेरा दिल है ही थोड़ा बड़ा! पर अभी मैं ऑफिस कॉल में हूँ! तुम party- return!! मुझे तंग मत करो!" "तुम ऐसे लेटे लेटे ऑफिस का कॉल कर रहे हो?" "हाँ पियक्कड़!!" "अरे बहुत शोर है यार बारापुला के रस्ते में! तुम मुझे प्रिये बोल रहे हो और  मुझे पियक्कड़ सुनाई दे रहा है!" "मैं पियक्कड़ ही बोल रहा हूँ!" "बताओ! जनाब लुढ़क रहे है! फैले हुए हैं! काम भी किसी तरह लेटे लेटे हो रहा है! और मुझ पर ये सब इल्जाम!"  "अब क्या करें! अंदर तक जकड लिया है तुमने! जड़ें और फैले, इसलिए फैला हुआ हूँ मैं! बस इसीलिए लुढ़का हुआ-सा दिखता हूँ!"  "वैसे हमने  साल भर पहले सोचा था ये जड़ों का  फैलना, रगों में दौड़ना कुछ ही समय के लिए होता है! फिर दुनिया-दारी! रस्मों-रिवाज़!"   ...

ला-जवाब!

"पता है मुझे सबसे ज्यादा ख़राब क्या लगता है?" "क्या?" "ये जो तुम मेरे बातों का जवाब नहीं देते हो!"  "हाहाहा! बस इतनी सी बात! वैसे लोग कहते है, मेरा जवाब नहीं!" "अच्छा!! ला-जवाब वैसे इस वक़्त मैं  साबित हो रही हूँ! बोलती तुम्हारी बंध है!" "वो तो ऐसा है के तुम जब चहकती हो, तो उसकी महक में, मैं थोड़ा बहक जाता हूँ! वरना.... "  "वरना...मैं समझ गई!  तुम्हारा जवाब नहीं!"

चुना लग गया?

PC: Google पानवाला: "क्या बोला आप ने?"  खरीदार: "बोला, दे दो माचिस! प्यार से बोला भाई!" पानवाला: "अब प्यार किसने देखा है! भूत प्रेत जैसा है वो भी!" खरीदार: "बातें बनाओ अब तुम!" पानवाला: "हाँ! और काम ही क्या है मेरा! कभी बातें बनाता हूँ, कभी चुना लगाता हूँ! "

कारोबार ए ज़िन्दगी

"ये तुम गोद में बैकपैक लेकर क्यों बैठी हो? " "तो क्या सर पर रख लूँ?" "सामने वाले सीट पर।  सुमित भाई, नज़र रखियेगा! मैडम के हीरे है इसमें।" "ओके सर" "सिर्फ हीरे है उसमे मेरे?" "ऑफ़ हो! गोल्ड का कारोबार भी शुरू कर दिया तुमने? छोड़ क्यों नहीं देती तुम ये सब!" "छोड़ दूंगी तो खायुंगी क्या? पापी पेट का सवाल है बाबा!" "अच्छा!! चलो! नशीली दवाई का धंदा तो छोड़ दो।  देश का फ्यूचर खराब हो रहा है!" "अब मैंने किसीको थोड़े ही न बोलै है इस्तेमाल करने को! सब अपने मर्ज़ी के मालिक है!" "फसोगी एकदिन तुम!" "फस तो कब का चुके है जानेमन!" "वैसे सुमित भाई के ब्रदर पुलिस में है! छुड़ा लेंगे! क्यों सुमित भाई ?" "हाँ सा'ब! बस मैडम को बोल दो बुलंदशहर में पकड़ी जाये! बाकि मेरा भाई सम्हाल लेगा!" 

दिल्ली का चुनाव

ऑटो में ...  मैडम, तो इस साल आप करने का क्या सोच रहीं है, दिल्ली में?  मैडम: भैय्या सोचेंगे तो तब, जब ज़िंदा बचेंगे। आप गाड़ी धीरे चला लीजिये!!  ड्राइवर: डरते क्यों है मैडम! वैसे हम तो इस बार कमल खिलाएंगे दिल्ली में!  मैडम: अच्छा! ऐसा क्यों? कमल ने क्या कमाल किया है दिल्ली में? ड्राइवर: मैडम समझती नहीं है आप! संविधान को बदलना है ! मैडम (अब अच्छा खासा डरे हुए आवाज़ में): कमल संविधान को बदल देंगे? और बदलना क्यों है?  ड्राइवर: पुराना हो गया है! PC: Google मैडम: और गीता को?  ड्राइवर: उसका  क्या ?  मैडम: मैंने सोचा गीता तो और भी पुराना हो गया है! तो उसको भी लगे हाथ बदल डालते है।  ड्राइवर: क्या मज़ाक करते हो मैडम!  मैडम: शुरू किसने किया था?

कितनी पैट्रिआर्केल दुनिया हैं!!

" चलो! आज थोड़ा ज़ायक़ा बदलते हैं!  दिल्ली के रास्तों में आज मैं तुम्हे फॉलो करती हूँ।  नहीं तो हर रास्ता मैं ही बताती रहती हूँ!" "चुप रहो! कुछ भी!" "सच को दबा नहीं सकते तुम! सच तो सामने आकर रहेगा! इंक़िलाब  ज़िंदाबाद! हर ज़ोर ज़ुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा हैं !" "अरे अरे!! वैसे ये तो होना ही था! क्रांतिकारी से जो इश्क़ कर लिया! हर बात पर मोर्चा! यह है मिज़ाज  इश्क़ के तेरे!" "फैज़-वाला इश्क़ है  ये!" "जिस्म पर मेरे तेरे लबों के एक भी निशान नहीं! बस झंडे गाढ़ जातें है वह! क्रांतिकारी से इश्क़ कर लिया!"  "ओय होय! मार ही डालो! तुमने लिखा?" "हाँ! और क्या! अब चोर तो मत कहो! वैसे ये लाइन्स औरतों के हो तो ज्यादा फिट रहेगा , नहीं? सैयां मोरा क्रांतिकारी!!" "बताओ!  कितनी   पैट्रिआर्केल दुनिया हैं! क्रांतिकारी सिर्फ मर्द होते हैं?! झंडा सिर्फ वही गाढतें हैं?" "उफ़्फ़्फ़! तुम भी ना!"