"अर्ज़ किया है.... लबो-गुलाब के हम नहीं क़ायल*, जब तक न पुकारे नाम मेरा या कोई छाप न छोड़ जाए जिस्म पर मेरे!" "क्या बात करते हो!! नहीं नहीं! तुम्हारे लबो-गुलाब के क़ायल तो हम हर पल है!" "सुना है एक नयी मशीन आने वाली है! लबो-गुलाब* की फोटोकॉपी करने के लिए! तुम्हारा प्रॉब्लम जल्दी ख़तम हो जायेगा!" "अरे वाह! असली मुझे भेज देना। फोटोकॉपी तुम रख लेना! काम चल जायेगा तुम्हारा!" "हाहाहाहाहा!! इसी हाज़िर-जवाबी पर तो मरते है जानेमन!" "बस?" "हाँ! और क्या? बाकि तो सब एवरेज ही है तुम में!!" "अच्छा?!" "हाज़िर-जवाबी ही है बस! और शुक्र करो वो है! वो न होता तो तुम नज़र भी नहीं आती!" " आय हाय! सच में?" " एकदम! तुम्हारा पूरा तारुफ़* बताऊं तो, 'एवरेज-सी-हर-फन-मौला*-हाज़िर-जवाब-वाली! इनकी कोई शाखा नहीं है!!' " "हममम... और तुम बद्तमीज़ हो! कभी मैंने टैटू करवाया इसका, तो जान लेना तुम्हारा ही नाम लिखवाया है!" "सही है! टैटू करवा ही ...
Dastan e Guftagu is dedicated to everyday humour in conversations that make you smile, laugh, enjoy life a bit more. Quips in conversation and wit have always attracted me. So much so that I remember these conversations and started noting them last year. I created this blog to share the fun.