Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Poetry

फिर न कहिए कि मुद्दआ कहिए!

"पर बताओ, मैं इतनी ख़राब हूँ क्या? छुपाकर रखने लायक?" "हम्मम!" "अरे मैंने भी क्या पूछ लिया! जाने दो! जवाब मत दो!" "हाँ!" "हाँ, क्या?" " दे दिया! सवाल का जवाब!" "आय हाय! इतनी ख़राब हूँ मैं? तुमने उनसे agree किया? ठीक है! कोई बात नहीं! कहिए कहिए मुझे बुरा कहिए ...ज़ालिम दुनिया! " "अब देखो ख़ुद को! ज़िक्र मेरा, उम्म्म मेरा मतलब है, ज़िक्र सच का सुना तो चिढ़ के कहा, किस दिवाने की बात सुनते हो!!" "अरे रहने दो अब! दाग़ से जावेद क़ुरेशी तक मत भटको! सदियों भटक जाओगे!! वो भी ग़लत सलत! वो कहते है न, आप अब मेरा मुँह न खुलवाएँ, ये न कहिए कि मुद्दआ कहिए  -  अब तो बोल ही दिया तुमने..." "जान क्यों जलाती हो? तुझ को अच्छा (भी) कहा है (जाने) किस किस ने, कहने वालों को और क्या कहिए!" "ओय होय!! शुक्र है!! वापस तो आए दामन ए दाग़ में... ताना ही सही! आ गई आप को मसीहाई , मरने वालों को मरहबा कहिए ... "   "तुम मरने वाली हो?" "नहीं! नहीं! मैं नहीं! दाग़! उन्होंने कहा ये!" "अरे अरे! उम्मीद स...

ड्रामेबाज़ी

"सॉरीईईई!!! मुआफ़ी!" "ड्रामेबाज़ हो तुम!"  "तुमसे कम!" "इसमें भी?"  "क्या मतलब?"  "सब कुछ में पीछे ही रहते हो!! आगे बढ़ो!  कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत* का भरम रख!"  " उफ़!  ड्रामेबाज़ हो तुम!!"   *पिंदार-ए-मोहब्बत: Pride of love

सुस्त सी नज़्म

" एक सुस्त सा खयाल आया है!"  "सुनाओ"  "सुस्त उँगलियों से कुछ सुस्त सी नज़्म लिख दूँ तुम्हारे जिस्म पर!"  "अब तक लिखा है तुमने  नज़्म कोई?"  Image Courtesy: Goog l e "लिखूंगा! पहले पढ़ तो लूँ.... जिस दिन हरफ़ दर हरफ़ पढ़ लूंगा तुम्हे, हर हरफ़ को छू कर जैसे मेज़ पर रखा ब्रेल में बना नक़्शा हो  कोई इस शहर का! उस दिन लिख लूंगा कोई जादुई नज़्म!" "और तब तक?"       "तब तक कोशिशें जारी-ओ-सारी रहेंगी!" 

किस्सा क़त्ल ए आम का

"ये बताओ के जान गयी कैसे?"  "तो साहिबान, बात कुछ यूँ हुई के,   कुछ बुँदे वारिस शाह ने बरसाया,  तो कुछ रंग बुल्ले शाह ने मिलाया,  कुछ धीमी आँच खुसरो लाए,  तो कभी सुल्तान बाहु गहरा कर गए हर बात !" "फिर?"  "फिर बच कौन सकता था भला? क़त्ल होना तो तय था!"