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Showing posts from July, 2020

सेंस, सेंसिबिलिटी, और अना

"अच्छा एक बात बताओ! अगर तुम्हारी माशूका होती कोई उसी शहर में या तुम्हारा अज़ीज़ दोस्त किसी हॉस्टल में फसा हुआ होता तो लॉकडाउन 1, 2, 3, या 4  में मिलने जाते?"  "नहीं यार! बिलकुल नहीं!" "और लॉकडाउन के बाद? अनलॉक  में?" "हाँ क्यों नहीं!" "क्यों यार? ऐसा क्यों करते तुम?" "अरे!  जोश में होश नहीं खोना चाहिए!" "अरे बाप रे! फ़िल्मी डायलॉग क्यों दे रहे हो? कौन सा जोश? कैसा होश?" "अरे लॉकडाउन में मिलना गैरकानूनी था न!" "अच्छा!! होश कानूनी पानी के छिड़काव से आता है? मैंने सोचा कोई गहरी समझदारी की बात कर रहे हो। कुछ साइंस है इसके पीछे! सोचा तुमने स्टडी किया होगा उस वक़्त कोरोना ज्यादा फ़ैल रहा था!"    "तुम मिले लॉकडाउन में  किसी से?" "हाँ बिलकुल! कुछ दोस्तों से मिली थी फेज 4 में! और बहन से.... "   "अरे क्यों? कितनी स्टूपिड  हो तुम! तुम जैसे लोगों के लिए ही कोरोना फ़ैला हुया हुआ है!"  "अच्छा!! ऐसा क्यों?"  "मना था न मिलना? बाहर निकलना गैर कानूनी था!"  "नहीं! भूल ...