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Showing posts from August, 2020

एक पंथ दो काज!

 "अच्छा सुनो! एक हार दिखाना था..." "दिखाओ" "ये लो!"  "ये तो साड़ी है!"  "अरे हार भी है देखो तो!" "ओह ये हार है? ऐसा तो पायल होता है!" "इतना चौड़ा? साफ़ दिख रहा है हार है! " "अरे दो  पायल  रख दो एक साथ! हो गया बस।"   "कुछ भी बोल दो बस! अच्छा है के नहीं बताओ।"   "अच्छा तो है।  कितने का है?" "अब कीमत तो देखो कुछ  ज़्यादा ही है! !"  "अरे राम राम! मत खरीदो! मेरे मम्मी के पास बिलकुल ऐसे वाले है.... पायल।"   "तुम्हारे मम्मी के पास है तो मैं क्या करूँ? चोरी करके लाओगे मेरे लिए?" "हाँ लाता हूँ! अगली बार। पक्का!"  "कब जाओगे फिर घर?" "जल्दी है तुम्हे?" "हाँ एक पंथ दो काज! मुझे हार मिल जायेगा और तुम जेल चले जाओगे। तो ये बकवास भी नहीं सुनना पड़ेगा।  आजकल कोविड का टाइम है, मिलने नहीं देते!" "अरे ऐसे नहीं बच सकती तुम! ई-मुलाकात जारी है!" "हे राम!!"