Skip to main content

Posts

Showing posts from February, 2021

"आप का नमक खाया है सरदार!"

"अरे तुम्हें पता है सांभा प्रकट हुआ था !  मिल ना चाहता था !"  "अचानक? अब क्यों?"  "बोला कि आत्मग्लानि है उसे! जब सरदार उर्फ़ जोड़ीदार बुखार में पड़ा तड़प रहा था, तब सांभा ने उसका घर लूटा, निहत्ता पड़ा देखकर सब कुछ उठाकर ले गया, कुछ नहीं छोड़ा, ओढ़ने का चद्दर तक नहीं। अब उस बात के लिए शर्मसार है!"  "ओए  होए!!  श... र्म... सा... र?! भाईसाब! कवि तो है सांभा!! शब्द तो देखो! इतने समय बाद  अचानक आत्ममंथन?!" " अरे तुम भी!!  ज़िंदा मिल ने की उम्मीद नहीं की होगी  न !   किसी तरह शख्त-जान  ज़िंदा  रह   गई तो  अपनी  लूटी हुई इज्जत बटोरने की इच्छा जाग गई होगी!" "हम्म्म.....या फिर अपनी गुनाह कबूलकर स्वर्ग में बर्थ रिज़र्व करने आया होगा! सच बताओ, तुम भूरा रंग का कुछ तो नहीं पहनी थी? क्या पता  इंसान के बदले,  चर्च का कॉन्फेशन बॉक्स लगी हो 😏 ... "  "अरे गुस्सा क्यों होती हो?"  "नहीं होऊं? बेगैरत, बेहया आदमी!!" "बस! बस! समय लग जाता है - सोचो ज़रा! कुम्भ का स्नान भी तो बारह साल में आता है।  त...