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Showing posts from March, 2020

कुछ इश्क़! कुछ काम!

"सोच रहा हूँ बाल और छोटे करवा लूँ!" "क्यों? अभी तो बोल रहे थे बढ़ाना है।"    "सोचा तो था, पर बढ़ेगा नहीं! समझ आ गया मुझे! तो एकदम छोटे करवा लेता हूँ। क्रू कट! क्या बोलती हो ?"  "करवा लो! घर की खेती है।"   "तू म  भी करवा लो।"   "अरे! अब मैं क्यों कराऊँ?"  "क्यूट लगोगी!" "अच्छा?!" "हाँ यार! वैसे तो कभी लगती नहीं हो।  बाल छोटे करा के देख लो! शायद बात बन जाये!" "क्या बोला!! हमममम .... . आप को ठीक दो मिनट का टाइम दिया जाता है इस वाक्य को दुबारा सोचकर बोलने के लिए ! Or this will be forever held against you in the court of ....." "अरे अरे! तुम भी न बेकार में भड़कती हो!  मैं  तो ये  बोल रहा था, इतना ज्यादा क्यूट लगना दुनिया के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए बाल छोटे करवा लो। क्यूटनेस कम हो जाये थोड़ा, तो दुनिया-वाले काम भी कर लें !" "अब ठीक है! "

लजीज़ और खुश-ज़ायका!

"कल जब हम मिले तुम  बहुत ही cute लग रही थी!" "जब मिले तब? बाद में नहीं?" "हाँ यार! बस दो चार सेकंड के लिए! बाद में तो नॉर्मल हो गयी!" "वाह वाह! बड़प्पन देखो तुम्हारा! दो चार सेकंड याद भी रखा और बोल भी रहे हो!"  "वो तो  मेरा दिल है ही थोड़ा बड़ा! पर अभी मैं ऑफिस कॉल में हूँ! तुम party- return!! मुझे तंग मत करो!" "तुम ऐसे लेटे लेटे ऑफिस का कॉल कर रहे हो?" "हाँ पियक्कड़!!" "अरे बहुत शोर है यार बारापुला के रस्ते में! तुम मुझे प्रिये बोल रहे हो और  मुझे पियक्कड़ सुनाई दे रहा है!" "मैं पियक्कड़ ही बोल रहा हूँ!" "बताओ! जनाब लुढ़क रहे है! फैले हुए हैं! काम भी किसी तरह लेटे लेटे हो रहा है! और मुझ पर ये सब इल्जाम!"  "अब क्या करें! अंदर तक जकड लिया है तुमने! जड़ें और फैले, इसलिए फैला हुआ हूँ मैं! बस इसीलिए लुढ़का हुआ-सा दिखता हूँ!"  "वैसे हमने  साल भर पहले सोचा था ये जड़ों का  फैलना, रगों में दौड़ना कुछ ही समय के लिए होता है! फिर दुनिया-दारी! रस्मों-रिवाज़!"   ...

बस आ ही रहा था मैं!

"ये उस दिन लिखा था जिस दिन झगड़ा हुआ था, झरना और हौज़-ए-शम्सी को लेकर!"  Mehrauli Jharna 
 "अच्छा?! उस पर क्यों?" 
"याद नहीं?"  
"एक तो तुम झगड़ा इतना करती हो यार! याद ही नहीं रहता झगड़ा किस बात पर हुआ था!"  
 "अच्छा!? मै झगड़ा करती हूँ? वो भी इतना के वजह ही याद नहीं होता आली जनाब को?"  
"अरे! सुनो तो! मैंने कहा, झगड़ा इतना होता है कि, यह वाला किस बात पर हुआ याद नहीं!" 
"उसके पहले ये भी बोला कि तुम करती हो! मैं सब ध्यान से सुनती हूँ!" 
"एक तो तुम सुनती इतना क्यों हो और याद भी इतना कैसे रख लेती हो यह भी मुझे समझ नहीं आता !" 
"मजबूरी है! क्या करे? वरना तुम्हारा क्या भरोसा! तुम तो झरना को हौज़-ए-शम्सी कह दो और अपने सारे शुरू किए हुए झगड़े मेरे मत्थे मढ़ दो!" 
"अब देखो! तुम अलग-अलग बातों को मत मिलाओ! झरना कभी भी हौज़-ए-शम्सी नहीं हो सकता,ये तो सही है, लेकिन दूसरे वाले बात की possibility आधी तो है ही न!" 
"हम्म...... वैसे झगड़े भले ही आधे मैं शुरू करूँ, ख़त्म सारे मैं ही कर...

तुग़लक़ी चुड़ैल

'तुम्हे वो चुड़ैल के नए कारनामों के बारे में बताया?' 'कौन सी चुड़ैल? दिल्ली वाली? बंगालन? ठीक है वो?' 'हाँ यार! वही दिल्ली-वाली-बंगालन चुड़ैल !! ठीक तो कुछ ज्यादा ही रहती है, भला उसे क्या होगा! ... पर बड़े ही  तुग़लक़ी अंदाज़ है उसके!' 'तुग़लक़ी अंदाज़ ?! वाह! .... कैसे?' 'हाँ! देखो न अब.... कुछ ही  दिन पहले की बात है , मैंने कहा, "तुम आराम कर लो। इतनी दूर मुझसे मिलने आने की क्या ज़रूरत है? तुम थकी होगी। तुम्हे खामखा तकलीफ होगी " तो बस पीछे ही पड़ गयी! बोली, "तुम्हे कोई problem होगा अगर मैं तुमसे मिलने आऊँ तो?" अब तुम ही बताओ इस बात में  भला मेरी problem की बात कहाँ से आ गई ?' 'फिर?' 'मैंने कहा, "अरे नहीं! मेरी problem की नही, तुम्हारी तकलीफ की बात हो रही है!" 'अच्छा ! तो?' 'बोली, " वो तो ठीक है, पर इस पर बात हो क्यों रही है? मैने तुम्हे कहा की मुझे कोई तकलीफ  होगी?" ' 'ये तो सही पूछा । कहा था उसने के तकलीफ होगी?' 'अरे तुम भी न। आदमी की समझ-बुझ भी कोई चीज़ ह...

लॉजिक की देवी और उनके भक्त

"कल तुम कितने बजे आ रहे हो?" "सुबह के पांच बजे । " "मैं आऊं एयरपोर्ट पर ?" "नही ! पागल हो तुम! " "अच्छा!? वैसे सच बताओ एयरपोर्ट के बाहर मैं मिली तो बहुत ज्यादा हैरानी होगी तुम्हे?" "तुम ना नही आ रही हो। ओके?" "हमम! वैसे तुम्हे पता है न ऐसे मुझसे बात करना खतरे से खाली नहीं है? " "अरे यार! मत आना प्लीज!! ऐसे बोलने पर चलेगा? " "अरे ये तो बताओ बहुत हैरानी होगी अगर मैं दिख गई बाहर?" "नहीं यार! तुम्हारा क्या ! तुम तो कुछ भी कर सकती हो!!" "अब  ठीक है! बिल्कुल ठीक! मुझे तो शक़ हो रहा था इतने समय में जाना भी है ठीक से मुझे, के नहीं!! " "चलो अब तो clear हो गया न? कोई challenge नहीं कर रहा तुम्हे।  मत आना तुम प्लीज।" "क्यों? कोई और होगी तुम्हारे साथ? " "हाँ! अब सही समझी। कितना देर लगाती हो!" "अरे वाह! फिर तो ज़रूर आती हूं और रेटिंग्स भी देती हूं। दस में से सही रहेगा?" "नही नहीं!  रेटिंग नही चाहिए! कोई रेटिंग क...

अंदर की बात!

"सुनो! तुम्हारा पति कंसलटेंट है न? मुझे जॉब देने बोलो!"  "हममम सॉरी! आपकी जानकारी काफी पुरानी है। मेरा बहुत सालों से कोई पति नहीं है! वैसे सच पूछिए तो "पति" तो कभी कोई नहीं था।  मेरे पे मिलकियत कभी किसी की नहीं रही!!"  "अरे तुम फेमिनिस्ट टाइप्स भी न! मिलकियत छोड़ो! ये बताओ, उसने तुम्हे क्यों छोड़ दिया?" "अच्छा!! छोड़ देना ज़रूरी है क्या? अलग नहीं हो सकते?"  "अरे ऐसे कैसे! कुछ तो हुआ होगा!"  "जिस दिन क़िस्सा-गोई का मन बनाउंगी सबसे पहले आप को ही बताउंगी! फर्स्ट रौ में सीट ले लेना आप!"  "अरे कुछ  तो  बताओ! अंदर की बात! शर्माती क्यों हो? ऐसे और बहुत से क़िस्से मैं जानती हूँ! Let's discuss!"  "अच्छा?! ऐसा है क्या? Actually क्या बताऊँ!  बहुत ही unreasonable था वो ! बस एक दिन मैं शराब पी कर आयी और गुस्से में एक चांटा लगाया। एक ही! कसम से।  बस!! इतने से बात पर चला गया छोड़कर!! इतने से कोई जाता है क्या? आप ही बताइये! शादी के बाद ये घर ही उसका अपना घर था न? पर चला गया! क्या ज़माना आ गया है...