Skip to main content

सुपर-दीदी

 "उस रूम में छिपकली है! अब मैं नहीं जाने वाली वहाँ! Get into action!! भगाओ उसे!"

"अरे मां! ये बहुत बड़ी है।  ये मेरे हिम्मत- क्षेत्र के बहुत आगे का मामला है! मैं सिर्फ छोटी छिपकली की ज़िम्मेदारी ले सकता हूँ।  दुखिया दीदी को बुलाते हैं।"  

"अरे! शाम को उसे कैसे बुलाएँगे?"

"मैं बुलाऊंगा तो आ जाएगी दीदी।" 

"हाँ भाई! तुम लाड़ले जो हो!"


थोड़ी देर बाद - 

"दीदी, झाड़ू से खेलो मत आप उससे!"

"अरे बेटा देख तो! नीचे आ गई अब।"  

"भाग जाएगी वो, दीदी। छिप जाएगी अभी। छिपकली है वो!"

"अच्छा चल मार देती हूँ।" 

"नहीं नहीं!! मारो मत उसे! लाश ठिकाने लगाना पड़ेगा वरना!!"

"तो करना क्या है?"

"बाहर निकालो।  मम्मी नहीं सोएगी वरना।" 

"अच्छा चल, बाहर करके आते है।"  

 "आप ने उसे हाथ से उठा लिया? आप epic हो दीदी, epic!! आपका सुपरमैन ड्रेस कहाँ है?"

Comments

  1. Hahaha...didi gajab hain. Kahani ki asli nayika toh voh hi nikli. Superwoman salute😄🖖

    ReplyDelete
    Replies
    1. Arre mere ghar ki super-nayika bhi wo hi hai :D

      Delete
  2. दीदी मे है दम। इसलिए वो किसी नही है कम।😃

    ReplyDelete
  3. You and your ability to add drama and en extra tadka of life to life itself. How does one love you enough ☺️🎂

    ReplyDelete
    Replies
    1. Yesss... no one can love me "enough"! Tai tui ektu beshi beshi bhalobese fyal :*

      Delete
  4. Hahaha......epic didi. Sbka khyaal rkhti hain. Chipkali ka bhi

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

ये दिल्ली वाले!

"आज मै तुम्हारे घर आते आते रह गया!" "मेरे घर आ रहे थे? क्यों? हमारी बात तो नहीं हुई थी!"  "अरे सुनो तो! मैंने ऑफिस से जब उबर बुक किया तो  मेरे घर के बदले तुम्हारा घर  का  पता  लिया अपने आप!" "मेरे घर का? ये कैसे? भूख लगी थी क्या तुम्हे?"  "पता नही! फिर लाजपत नगर फ्लाईओवर देख कर समझ आया ये तो कहीं और जा रहा है.. " "ओह हो!"  "हाँ! फिर मैंने जल्दी से एड्रेस चेंज किया! पिछले दिन तुमने जो कच्चे आलू खिलाये थे, वो याद आ गए! ऑटो को बोला, टर्न अराउंड!" "बहुत सही किया! बहुत ही सही!! वरना आलू आज तुम्हारे माथे पर बनते! साल में चालिस दिन खाना खाते हो इधर, एक दिन का कच्चा आलू याद है! उनतालीस दिन का उम्दा पकवान नही! बहुत सही किया ऑटो मोड़ लिया। इधर आना भी मत तुम!"

चोर का इमोशन होता है, पर चुड़ैल का?

"अब मान भी लो!"  "क्या?"  "ये काम तुम्हारा ही है न?" "कौन सा?" "ये फ़ोन गायब होना?" "अरे! मै दूसरे शहर में हूँ! मेरा काम कैसे होगा?"  "सच बताओ!" "नहीं भाई! मानती हूँ के मुझे ही फ़ोन न करो तो फ़ोन की तुम्हे ज़रुरत क्या है, ऐसा लगा था मुझे......"  "वही तो!  अब छुपाओ मत! राज़ खुल गया! ये सब वही है।  तंतर मंतर जादू टोना! अब तो साबित  ही हो गया के तुम ही वो बंगाली चुड़ैल हो जिससे हम बिचारे हिंदी प्रदेश के लोग सदियों से डरते आये है!"  "सदियों से?" "हाँ! हाँ! सदियों से!"  "अच्छा! और ये नहीं सीखाया गया हिंदी प्रदेश के लोगों को के अंधे को अंधा, बहरे को बहरा , चुड़ैल को चुड़ैल नहीं बोलते?"  "नाह! हमे सिर्फ सिखाया गया है के चोर को चोर नहीं, चौकीदार बोलते है! चोर का भी इमोशन होता है आखिर!!" 

तू कौन मैं खामखा!

  "जल्दी से गाड़ी में बैठो! रस्ते में खड़े क्यों हो?" "अरे मैं अमरूद भूल गया।"   "अब रहने दो! वापस तो जा नहीं सकते!" "अरे नहीं! ये तो बहुत ही बुरा है ।  मुझे अमरूद खाना था।" "उफ्फ! बच्चे मत बनो।  कोई मर नहीं रहा बिना अमरूद के।"   "तुम्हें क्या पता? कोई मर जाये तो?"   "अरे छोडो भी अब।" "कैसे छोड़ूँ? अरे अरे!! वो देखो फल का ठेला वहां है।  भैय्या, गाड़ी रोकिये!  मुझे अमरूद लेना है।" "नहीं! नहीं! बिलकुल गाड़ी मत रोकिये, भैय्या! मुझे जल्दी पहुंचना है।  मीटिंग है। हम घर पहुँच जाये तो फिर तुम निकल जाना आम, अमरूद कुछ भी लेने। " "हे राम! ये औरत तो मुझे अमरुद भी नहीं दिला रही है! कितनी ज़ालिम है! भैय्या, अब आप रोक दीजिये बस गाड़ी!"  "अब क्यों? ठेला वाला तो गया।" "अब मैं जमीन में लेट जायूँगा, पैर पटकूंगा, और अपने ऊपर मिट्टी डाल लूंगा!! सब को बताऊंगा ये तो मुझे अमरुद भी नहीं दिलाती है!" "हममम ... रोक ही दीजिये भैय्या गाड़ी फिर! लेकिन १ मिनट के लिए। इसे उतारकर तुरंत भाग जायेंगे - फिर...