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हिसाब मत करो, दिल की सुनो!

"सुनो, कहाँ जाने में कितना देर लगेगा ये सब क्या हिसाब लगाना! किसी ने कहा है, ज्यादा हिसाब मत करो, दिल की सुनो, चमकते रहोगे। हिसाब करने वाले लोग देखने में अजीब हो जाते है।"   "अच्छा!?"  "हाँ! वैसे भी तुम्हारे शहर का नक्शा अब बदल जायेगा।"  "वो कैसे?" "जैसे जैसे इस शहर को हम छान मारेंगे, हर सड़क का नाम बदल जायेगा और उसका पहचान भी! गूगल बोलेगा कुछ और, तुम्हारा दिल कोई और ही नाम दे चूका होगा उसका।"   "फिर तो क्या ख़ूबसूरत सूरत होगी इस शहर की।  सारा शहर ही क्यों न बदल लें हम?"  "क्या करना है? " "चलो पुरे शहर में गाना, कविता, और हँसी बो आते है। फिर हम दोनों में से कोई कभी भी कोई भी जगह अकेला नहीं होगा इस सहर में।"   " सही! हम में से एक नही होगा तो गीत होंगे, शेर होंगे, और यादें भी!" "चमको! चमको! चमको! चमको!" "नाम जप रहे हो? अब यही तुम्हारा नाम हो जायेगा!" "ऐसा क्यों?"  "सुना नहीं? रांझा रांझा करदि नी मैं आप रांझा होई!!" "बहुत खूब! तो फिर सद्दो नी मैनूँ धीदो राँझ...