"आज मै तुम्हारे घर आते आते रह गया!" "मेरे घर आ रहे थे? क्यों? हमारी बात तो नहीं हुई थी!" "अरे सुनो तो! मैंने ऑफिस से जब उबर बुक किया तो मेरे घर के बदले तुम्हारा घर का पता लिया अपने आप!" "मेरे घर का? ये कैसे? भूख लगी थी क्या तुम्हे?" "पता नही! फिर लाजपत नगर फ्लाईओवर देख कर समझ आया ये तो कहीं और जा रहा है.. " "ओह हो!" "हाँ! फिर मैंने जल्दी से एड्रेस चेंज किया! पिछले दिन तुमने जो कच्चे आलू खिलाये थे, वो याद आ गए! ऑटो को बोला, टर्न अराउंड!" "बहुत सही किया! बहुत ही सही!! वरना आलू आज तुम्हारे माथे पर बनते! साल में चालिस दिन खाना खाते हो इधर, एक दिन का कच्चा आलू याद है! उनतालीस दिन का उम्दा पकवान नही! बहुत सही किया ऑटो मोड़ लिया। इधर आना भी मत तुम!"
"अरे इतना नहीं सोचना है हमें! तुम्हें तो पता ही है न कि औरतों का दिमाग़ छोटा होता है!" "अरे बाप रे! अब ये तुम्हें किसने कह दिया?" "मेरे चाचाजी। डॉक्टर हैं न। उन्होंने कहा, 'देखो, लड़कर कुछ नहीं होगा। मर्द ज़्यादा बड़ा दिमाग ले कर पैदा होते हैं। औरत का ब्रेन, मर्द से वज़न में हल्का होता है। यह तो साइंस है। झूठला नहीं सकती तुम! तो कोशिश क्यों करना! शांति से घर बैठो।' " "आह! और उन्होंने ये भी कहा होगा कि बस मर्द के extinct होने तक इंतज़ार करो?" "Extinct क्यों होंगे? तुम फेमिनिस्ट्स भी न!!" "अरे अरे!! इतनी जल्दी फेमिनिज्म पर मत जाओ! हम अभी साइंस पर बात कर रहे है न? तो ये बताओ Neanderthal मानव याद है तुम्हें?" "वो बहुत बड़ा सर वाला? वो तो बहुत पहले था!" "हाँ! सारे मानवों में सबसे ज़्यादा वज़न उसके ब्रेन का था। Extinct हो गया! दुनिया से ग़ायब!!" "हाय हाय!! क्या बात कर रही हो! मर्द भी extinct हो जायेंगे?" "हाँ! कुछ लाखों करोड़ो सालों में। ब्रेन की वजह से नहीं। मर्दों का जीन कमज़ोर है। मैं नही...