"सुनो! तुम अजीब तरीके से सोते हो! जला हुआ हाथ ढक कर सोना!"
"पक्का?! हाथ धो कर नहीं?"
"धोना क्यों है? रुई से साफ़ कर लो और बैंडेज से ढक लो!"
"या ख़ुदा!! क्या करे इस औरत का! इसने तो ह्यूमर बेच कर फिश-फ्राई खा लिया लगता है! "
"याददाश्त बेचकर पेप्सी पी* थी और अब ह्यूमर बेच कर फिश फ्राई?"
"अब ऐसा ही है तुम्हारा तो! जाने कब क्या कर लो!"
"देखो! मैं दिलवाली हूँ। सेल पर बेस्ट चीज़े चढाती हूँ। याददाश्त बेचना पड़े तो मेरी! और ह्यूमर बेचना पड़ा तो तुम्हारा!"
"अच्छा?"
"और नहीं तो? ईमान-धरम भी कोई चीज़ है! अब तुम्हारी याददाश्त बेचते हुए, 'ले लो! ले लो! ऐसी याददाश्त कहीं नहीं मिलेगी! ऑफर में है! ले लो!' ऐसा तो नहीं बोल सकती न!"
"ओह हो! क्या सही जा रही हो। पर लगता है, सही बनिया नहीं बन पाई तुम जात से!"
"देखिये! जात पर मत जाइये! हम रेसिस्म से सख़्त परहेज़ करते है!"
"आह! जात न पूछो फेमिनिस्ट की, मत भूलो भाई शान ..... "
"बेकार पड़ेंगे पैंतरे, बेकार जाएगी जान!!"
*याददाश्त बेचकर पेप्सी: https://dastan-e-guftagu.blogspot.com/2019/12/blog-post_15.html

और ये परहेज़ वाली लिस्ट बहुते लंबी है वैसे।
ReplyDeleteसब पैंतरे परेशान -- खतरा ऐ जान
Hahaha.. Bahut lambiiii.. I am on perpetual diet
DeleteTruly your style is unique, humor and satire - delicate and gentle yet leaves it's mark. Amazing !
ReplyDeleteThis is one of the best ways that one could have received this blog! Thank you!
DeleteFish fry bangali or pepsi vilayati lagti hai..
ReplyDeleteFeminism mein hi bande ki bhalai lagti hai..
Hahahaha... feminism me sabki bhalayi hai! Ommmmmm!!!!
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