"अच्छा सुनो! एक हार दिखाना था..."
"दिखाओ"
"ये लो!"
"ये तो साड़ी है!"
"अरे हार भी है देखो तो!"
"ओह ये हार है? ऐसा तो पायल होता है!"
"इतना चौड़ा? साफ़ दिख रहा है हार है!"
"अरे दो पायल
रख दो एक साथ! हो गया बस।""कुछ भी बोल दो बस! अच्छा है के नहीं बताओ।"
"अच्छा तो है। कितने का है?"
"अब कीमत तो देखो कुछ ज़्यादा ही है!!"
"अरे राम राम! मत खरीदो! मेरे मम्मी के पास बिलकुल ऐसे वाले है.... पायल।"
"तुम्हारे मम्मी के पास है तो मैं क्या करूँ? चोरी करके लाओगे मेरे लिए?"
"हाँ लाता हूँ! अगली बार। पक्का!"
"कब जाओगे फिर घर?"
"जल्दी है तुम्हे?"
"हाँ एक पंथ दो काज! मुझे हार मिल जायेगा और तुम जेल चले जाओगे। तो ये बकवास भी नहीं सुनना पड़ेगा। आजकल कोविड का टाइम है, मिलने नहीं देते!"
"अरे ऐसे नहीं बच सकती तुम! ई-मुलाकात जारी है!"
"हे राम!!"

इस लगता है एक पंथ और तीन काज हो गए, लगे हाथ राम को भी लपेटे में ले लिया
ReplyDeletehahahaha... Covid nahi dikha aur E-mulakat? Tum jaldi chasma banwao :P
Deleteदिखा था। हे राम वाला लैंस ज्यादा हावी था लिखते टाइम। चलो 5 काज। ख़ुश। ओह हो। ये तो 3-5 हो गया गुफ़्तगू का
DeleteKoyi na .. hone do..ab Aziz dos kare toh sab sahi!
Delete*ऐसा लगता है
ReplyDeleteTum to khaani kaar nikali 💃🏼
ReplyDeleteAur tum ghani haryanvi nikle!
DeleteHey Ram! Haar mila ke nahi? Haarna matt, le kar rehna
ReplyDeleteI know! I have to be at it! (determined emoji)
DeleteThoroughly enjoyed reading :)
ReplyDeleteThere is an inherent element of pleasant suspense as to how the humour will unfold in every Dastan E Guftagu story.
That is such an encouraging comment! Thank you Manu!
Deleteअब तो सब ई होने वाला है, हार भी ई मिलेगा और प्यार भी ई, तकरार भी ई होगा और मनुहार भी ई, मंदिर, गिरजा घर सब तो ई हो गए पंडित भी ई हो गया, रुपये पैसे नौकरी सब ई हो गयी अब तो पुकार के कहना पड़ेगा ई राम ये क्या हो गया ई ई हो गया 😂😇
ReplyDeleteअरे वाह क्या बात कर दी!! ई तो बड़ी गजब बात हो गई!!
DeleteSuch an enjoyable read
ReplyDeleteThank you so much!
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