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मर्द तो मर्द का दोस्त होता है न?

"दीदी, एक बात बोलनी थी... "

 "बोलो"

 "हममम ...... "

"अरे बोलो तो। उदास चेहरा बनाकर डराओ मत।" 

"दीदी, वो एक लड़की रहती थी न मेरे पास, नीता, जिसकी शादी कराई थी मैंने, अब बोल रहे हैं चली गई वो घर छोड़कर, बच्चों को ले कर, परसो। बोल रहे हैं-कहीं नहीं मिल रही।"   

"मतलब क्या? ख़ुद चली गई या बच्चों समेत उठाई ली गई?" 

"नहीं। ख़ुद गई।  एक कपडे में.... कुछ ले कर भी नहीं गई।  देखा बोलती है पड़ोसन ने किसी के साथ, पर वो अब मुंह नहीं खोल रही है।"

"अच्छा! फिर तो सब ठीक है! उसे किसी से प्यार हुआ होगा, खुद अपने मन से गई और बच्चों को ले कर गई।  ठीक होगी फिर तो। तुम क्यों परेशान हो?"

"अरे दीदी! शादी मैंने करवाई थी न! अब फ़ोन करके बोल रहे हैं, 'आपने अच्छी लड़की बोला तो हमने शादी कर ली, अब भाग गई!'"

"छह साल पहले बोला था न! अब क्या है? छह साल में दुनिया कहाँ से कहाँ चली जाती है।"

"सो तो है दीदी! पर ये लड़की भी कैसी है! सुना है मारता भी नहीं था पति उसका।  बताओ! फिर भी चली गई!!" 

"हाँ ये तो गलत बात है! ले आती उसको भी घर।  तुम्हारा पति भी तो तुम को लाया था न? दूसरी भी तो थी। पहली बीवी मारती थी उसे?"

"नहीं दीदी! वो तो अच्छी है।  हम दोनों रहे।  दोनों के बच्चे पले।पर दो मरद कभी रह पाएंगे साथ?"

"क्या बात करती हो? नहीं रह पाएंगे? औरत ही औरत की दुश्मन होती है न? मर्द तो मर्द का दोस्त होता है! " 

"बोलते तो यही हैं! पर दो मरद एक घर में रहे तो मार ही डालेंगे एक दूसरे को!" 

"अब बताओ फिर? नीता के पास कोई और तरीका था?"

"नहीं! लेकिन दीदी वो लोग अब पुलिस में रिपोर्ट करने का सोच रहे हैं।  तो मैंने कहा रुको! दीदी से पूछ कर बताती हूँ!"

"पुलिस क्यों?'

"अरे बच्चे ले कर गई न!" 

"माँ बच्चा छोड़कर जाती तो कितना बुरा भला कहती तुम उसको!  अभी अपने भांजे की बीवी के बारे में नहीं कहा था कि वो दूधमुंहा बच्चा छोड़कर चली गई!"

"अरे पर बच्चा इस आदमी का है न?" 

"अभी जो तुम्हारी भतीजी मरी तो उसके बच्चे तुम मायके वाले ले आए! रख कर जाती तो बाप अकेले पालता?" 

"अकेले कैसे पालेगा?"

"बस तो सही है! यहाँ दूसरी माँ होती, वहां दूसरा बाप है।  फर्क क्या है?" 

"नहीं है फर्क?" 

"सोचकर देखो।माँ बाप में से एक तो बदलेगा ही किसी भी सूरत में!"

"हाँ बच्चा नहीं रहेगा माँ को छोड़कर!"

"तो क्या बोलती हो? नीता ने ठीक किया के नहीं? खुश रहे सब अपने अपने !" 

"अब उपाय तो उसके लिए कुछ और दिख नहीं रहा! पर कुछ भी बोलो दीदी, ऐसे जाना नहीं चाहिए पति छोड़कर!"

"सही कहा! दोनों पति को एक घर में रखने का भी कोई तरीका निकालना चाहिए!" 

"हाहाहाहा......तू भी न दीदी!! हँसाती है बहुत! एक ही से पागल हो जाती है औरत, दो पालेगी?" 

"बाग़ी बन गई हो अब तुम तो। बोल रही हो, औरत पालती है मर्द को? धीरे बोलो! लोग क्या कहेंगे!!"

"अब दीदी सच तो वही है न?" 

"हाँ! अब सो भी है!" 😊

Comments

  1. बेहतरीन, बहुत ही सरल शब्दों में मर्मस्पर्शी विषय को व्यक्त किया गया है इस सहज संवाद में।सच है लोग कहते है कि औरत -औरत की दुश्मन होती है, लेकिन क्या सच मे यह सही है।।मतभेद , या मनभेद हो सकता है मगर दुश्मनी शायद बहुत ही काम मामलों में होता है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर भी कई बार वह बहुत सच्ची सहेली साबित होती है।

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  2. Story absolutely fits into gender disparity society...where male is being protected even by women, representing him as victim ....a blind judgement in favour of men. These always demoralise a woman's decision making.

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    1. Absolutely Alok! In this case also they are waiting to prove how the woman is wrong is choosing someone else over the one she was married to.

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  3. Bahut hi khub..
    Samaj ye kahta hai "Aaurat-Aaurat ki dushman hoti hai" Aur ye bhi kahta hai ki "Ek Mard dusare Mard ko jaan se mar sakte hai".
    In dono Vakya mein Doshi to purush hi hua....fir bhi gunahgar Mahila ko hi mana ja raha hai.. Hay re duniya..

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    1. Wah...Matlab maza hi aagaya
      Byfar this is the best blog I've read.

      Chummeshvari performance Nayana

      Auratein auraton ke sath reh sakti hai,sab baant sakti hai, mard toh mard ko maar hi dalega. Baat toh sahi hai..
      Bole toh dost dost na raha, or dushman dushman dost ho gaye...

      Wah re wah..

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    2. "Chummeshvari performance" is hilariously good Nitika :) Thank you!

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  4. Wah wah...loved this one. Wonderful dialogues and roles...So funny and insightful.
    Think about more conversations between these two on similar lines please!! Also, this naive but all pervasive worldview of the woman being the wrong doer and deserving blame, no matter the situation, needs your beautiful deconstructing lens.

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    1. Thank you so much, Alak! most of the conversations posted here are based on some bit of real conversation although I may not always have been one of the two. I then use a liberal dose of creative thinking. At times bring a few fragmented conversation together. This one is very close to how it happened. I hope I get to engage with her more and get to create more of these guftagu :)

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  5. I came across a Bangladeshi film named Third person, singular number where the protagonist girl gets caught in a dilemma of choice involving his husband and her friend. She choses both of them. Naturally the film drew wrath from the fundamentalists.
    out there. You will get it in Youtube.
    Your writing is getting more and more fluent with every passing day. Try your hand in short stories.

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  6. From Kajli Roy: मर्द तो मर्द के जिगरी दोस्त होते हैं 😁
    बस एक साथ एक पत्नी के साथ मिलजुल कर नहीं रह पाते 😁
    मर्दों की मर्दानगी इजाजत नहीं देती
    क्या करें.…समझा करो यार ❤️😁
    बहुत ज्ञान देते हैं पति के घर मिल जुलकर सबको अपनाकर रहने का।
    कुछ दिन पत्नी के घर जाकर मिल जुलकर सबको अपनाकर रहकर दिखा दें तो जानें।
    बात करते हैं और ज्ञान देते हैं

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  7. Ye baat to sau taka sahi hai aurat aurat ke sath adjust kr legi, lekin mard wo to bilkul bardasht nhi kr skta maar dalenge dono ek doosre ko. Ab isko hmara sooo called samaaj patni prem girlfriend prem ki sangya dekr unki chhavi sudharne ka kaam bhi krta hai

    Loved this line, बाग़ी बन गई हो अब तुम तो। बोल रही हो, औरत पालती है मर्द को
    Bilkul sahi aurat hi paalti hai mard ko, lekin mard samjh aaye tab na.

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    1. Archana, aurat ko khud samajh aa jaye wo bhi bahut hai ❤️

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  8. Such a hard reality depicted through humor ! I loved the line - एक ही से पागल हो जाती है औरत, दो पालेगी?" Actually for me , convincing myself and " baki aurath " about this reality that women are the backbone of the society and everyday life , is the biggest challenge - but I am at it !

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  9. सही
    मर्द तो मर्द है,
    पर कैसा मर्द है जो कुछ दो दो, तीन तीन बीवियों के साथ रह लेता है और उसको बीवी को साथ नही रहने दे सकता।

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    1. I know! Kaisi mardangi ke itna bhi jigra nahi ke do - char aur mardo ko ussi ghar me rahne de!!

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  10. Replies
    1. दीदी की सोच और आप के अंदाज को सलाम

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