"ये तुम गोद में बैकपैक लेकर क्यों बैठी हो? ""तो क्या सर पर रख लूँ?"
"सामने वाले सीट पर। सुमित भाई, नज़र रखियेगा! मैडम के हीरे है इसमें।"
"ओके सर"
"सिर्फ हीरे है उसमे मेरे?"
"ऑफ़ हो! गोल्ड का कारोबार भी शुरू कर दिया तुमने? छोड़ क्यों नहीं देती तुम ये सब!"
"छोड़ दूंगी तो खायुंगी क्या? पापी पेट का सवाल है बाबा!"
"अच्छा!! चलो! नशीली दवाई का धंदा तो छोड़ दो। देश का फ्यूचर खराब हो रहा है!"
"अब मैंने किसीको थोड़े ही न बोलै है इस्तेमाल करने को! सब अपने मर्ज़ी के मालिक है!"
"फसोगी एकदिन तुम!"
"फस तो कब का चुके है जानेमन!"
"वैसे सुमित भाई के ब्रदर पुलिस में है! छुड़ा लेंगे! क्यों सुमित भाई ?"
"हाँ सा'ब! बस मैडम को बोल दो बुलंदशहर में पकड़ी जाये! बाकि मेरा भाई सम्हाल लेगा!"
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