"ये बुद्ध जयंती को बुद्ध पूर्णिमा क्यों बोलते है ?"

"जयंती भी बोलते है, पर पूर्णिमा के दिन आता है न! तो पूर्णिमा भी बोलते है।"
"पूर्णिमा बहुत ही ब्राह्मण-वादी शब्द नहीं है?"
"अरे नहीं नहीं!! बौद्ध धर्म के लोग पूर्णिमा को लेकर काफ़ी एक्साइटेड रहते हैं! श्रीलंका में तो हर पूर्णिमा को छुट्टी रहती है।"
"सच में?! साल में बारह छुट्टी?"

"हाँ!"
"सही है! तुम गई हो श्रीलंका, है न? तभी तुम्हें इतना पता है !"
"अरे नहीं! उस वजह से नहीं। मैं ठहरी आलीम फ़ाज़िल! मुझे सब पता है!"
"नहीं नहीं! इतनी भी कुछ ख़ास नहीं हो!"
"अरे हूँ यार! आत्म-ज्ञान है मुझे।"
"बड़ी आई आत्मज्ञान वाली!! दूसरे का भी दृष्टिकोण कुछ होता है आख़िर! उसका भी ज्ञान ले लो।"
"उम्म्म.... दूसरे विषयों पर दूसरों का ज्ञान ज़रूर ले सकती हूँ! दो!"
"अच्छा? किस विषय पर दूँ?"
"अब ये भी बात है! किस विषय पर भला!?"
"तुम न! उड़ो मत ज़्यादा! गणित पर चाहिए के कंप्यूटर पर? स्टेटिस्टिक्स? या सीधा artificial intelligence?"
"तुम मुझे गणित ही सीखा दो! शून्य से शुरू करो। ज़ीरो ही निकली मैं हमेशा !"
"हाँ! तुम मुझे लगती भी अक्सर ज़ीरो ही हो!"
"हाय हाय! सच में?"
"और क्या? ज़ीरो से क्या कम ख़तरनाक हो तुम? विभाजक में जम कर बैठ गई तो किसी को चीज़ अनंत बना दो!!"
"वाह! वाह! ये तो पता ही नहीं था मुझे!"
"देखा! मैं न कहता था आत्मज्ञान पूरा नहीं है अभी!!"
"सही है गुरु जी! मान गए।आप के चरण कहाँ है?"
Wahh... Power of zero..
ReplyDeleteShunya...
Vaise purnima bhi shunya ko hi darshati hai,ek bada sunya,..
Yes the power of zero is amazing indeed! We often forget that ..good he reminded, zero is hero!
Delete"शून्य और अनंत का मेल" वाह क्या तारीफ करने का अंदाज है। शून्य भी तो अपने आप में पुर्ण है... पूर्णिमा की तरह।
ReplyDeleteEkdam... purna hai apne aap me...
DeleteEhi 'sunya' k lia hi koi digit ka value hi badal jata hai..ehi sunya k lia hi to amir aur garib mey farak hota hai....
ReplyDeletebilkul sahi..power of zero
DeleteThis was my dessert after dinner tonight..bahut aanand ke saath tasaali see iska sevan kiya gaya..aur aapki taraf kuch positive vibes bheji gayein..humara muh meeta karane ke liye
ReplyDeleteWah wah.. Sun kar dil baag baag ko gaya.. Ab sair ko nikalti hu ❤️
DeleteI envy your prolificity at times, but really may we continue to be entertained, educated and benefit from unique and remarkable offsprings of your fertile mind. This time it was humour with some profound thoughts.
ReplyDeleteThank you so much! That is a lovely thing to say!
Deleteशून्य को ऐसे ही शून्य नहीं कहा जाता अपने आप में बहुत एहमियत रखता है और ताकतवर भी।
ReplyDeleteशून्य चाहे तो अनंत कर दे। चाहे तो शून्य!
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