'तुम्हे वो चुड़ैल के नए कारनामों के बारे में बताया?'
'कौन सी चुड़ैल? दिल्ली वाली? बंगालन? ठीक है वो?'
'हाँ यार! वही दिल्ली-वाली-बंगालन चुड़ैल !! ठीक तो कुछ ज्यादा ही रहती है, भला उसे क्या होगा! ... पर बड़े ही तुग़लक़ी अंदाज़ है उसके!'
'तुग़लक़ी अंदाज़ ?! वाह! .... कैसे?'
'हाँ! देखो न अब.... कुछ ही दिन पहले की बात है , मैंने कहा, "तुम आराम कर लो। इतनी दूर मुझसे मिलने आने की क्या ज़रूरत है? तुम थकी होगी। तुम्हे खामखा तकलीफ होगी " तो बस पीछे ही पड़ गयी! बोली, "तुम्हे कोई problem होगा अगर मैं तुमसे मिलने आऊँ तो?" अब तुम ही बताओ इस बात में भला मेरी problem की बात कहाँ से आ गई ?'
'फिर?'
'मैंने कहा, "अरे नहीं! मेरी problem की नही, तुम्हारी तकलीफ की बात हो रही है!"
'अच्छा ! तो?'
'बोली, " वो तो ठीक है, पर इस पर बात हो क्यों रही है? मैने तुम्हे कहा की मुझे कोई तकलीफ होगी?" '
'ये तो सही पूछा । कहा था उसने के तकलीफ होगी?'
'अरे तुम भी न। आदमी की समझ-बुझ भी कोई चीज़ होती है के नहीं ?! मैं खुद ही समझ गया उसकी तकलीफ, मुझे लगा बोल नही पा रही होगी!'
'अच्छा?! तुमसे खुल कर बात नही कर पाती?'
'नहीं! वो तो यार बोलती ही रहती है!! वैसे भी बंगालन चुड़ैल, दिल्ली के भोले लौंडों से कभी डरी है क्या?'
'ओह हो! और फिर भी लगा तुम्हे?'
'अरे तुम भी यार पीछे पड़ जाती हो! आराम ही तो करने के लिए बोल रहा था। कौन सा मेरे लिए कुछ करने को बोल रहा था! पर वो तो वो है!!'
'क्या बोली?'
'बोली," तुम्हें दिक्कत है, तो तुम अपनी दिक्कत समझाओ। अगर समझ पाई तो मैं पक्का नही आउंगी ! और अगर तुम्हे मेरे लिए फिक्र हो रही है तो वो भी बता सकते हो। फिक्र करना तो अच्छी बात है। पर फिक्र के बहाने control करना मर्दवाद की घीसी-पीटी तरकीब है!! ऐसा करो के फिक्र के बारे में बोलो, लेकिन फिर फैसला मेरा है के आना है के नहीं!" मैंने बोला, "मुझे फ़िक्र हो फिर भी फैसला तुम्हारा ही होगा? बताओ!!"'
'अब देखो! फैसला तो उसका ही होगा!'
'अरे तुम जाने दो अब! तुम तो agree करने लगी हो उससे! तुग़लक़ी चुड़ैल है वो.....तुग़लक़ी चुड़ैल ! हर बात में अपनी चॉइस ! हर फैसला खुद का!'
'उफ़्फ़! अपनी चॉइस! अपना फैसला! कितनी खराब बात है! है न?'
'हाँ! बस ये ही बात हो तो कोई सह भी ले। मैंने बात को संभालते हुए कहा "अरे मुझे तो बड़ा ही अच्छा लगता है तुम्हारा दूर मुझसे मिलने आना। मैं तो बस यूं ही न कर रहा था!" '
'खुश हो गई फिर?'
'बहुत ही! चहकते हुए बोली, "मुझे तो पहले ही पता था! मर्दों के न में अक्सर हाँ छुपी होती है!" '
'कौन सी चुड़ैल? दिल्ली वाली? बंगालन? ठीक है वो?'
'हाँ यार! वही दिल्ली-वाली-बंगालन चुड़ैल !! ठीक तो कुछ ज्यादा ही रहती है, भला उसे क्या होगा! ... पर बड़े ही तुग़लक़ी अंदाज़ है उसके!'
'तुग़लक़ी अंदाज़ ?! वाह! .... कैसे?'
'हाँ! देखो न अब.... कुछ ही दिन पहले की बात है , मैंने कहा, "तुम आराम कर लो। इतनी दूर मुझसे मिलने आने की क्या ज़रूरत है? तुम थकी होगी। तुम्हे खामखा तकलीफ होगी " तो बस पीछे ही पड़ गयी! बोली, "तुम्हे कोई problem होगा अगर मैं तुमसे मिलने आऊँ तो?" अब तुम ही बताओ इस बात में भला मेरी problem की बात कहाँ से आ गई ?'
'फिर?'
'मैंने कहा, "अरे नहीं! मेरी problem की नही, तुम्हारी तकलीफ की बात हो रही है!"
'अच्छा ! तो?'
'बोली, " वो तो ठीक है, पर इस पर बात हो क्यों रही है? मैने तुम्हे कहा की मुझे कोई तकलीफ होगी?" '
'ये तो सही पूछा । कहा था उसने के तकलीफ होगी?'
'अरे तुम भी न। आदमी की समझ-बुझ भी कोई चीज़ होती है के नहीं ?! मैं खुद ही समझ गया उसकी तकलीफ, मुझे लगा बोल नही पा रही होगी!'
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| Sundar Nursery, Delhi |
'अच्छा?! तुमसे खुल कर बात नही कर पाती?'
'नहीं! वो तो यार बोलती ही रहती है!! वैसे भी बंगालन चुड़ैल, दिल्ली के भोले लौंडों से कभी डरी है क्या?'
'ओह हो! और फिर भी लगा तुम्हे?'
'अरे तुम भी यार पीछे पड़ जाती हो! आराम ही तो करने के लिए बोल रहा था। कौन सा मेरे लिए कुछ करने को बोल रहा था! पर वो तो वो है!!'
'क्या बोली?'
'बोली," तुम्हें दिक्कत है, तो तुम अपनी दिक्कत समझाओ। अगर समझ पाई तो मैं पक्का नही आउंगी ! और अगर तुम्हे मेरे लिए फिक्र हो रही है तो वो भी बता सकते हो। फिक्र करना तो अच्छी बात है। पर फिक्र के बहाने control करना मर्दवाद की घीसी-पीटी तरकीब है!! ऐसा करो के फिक्र के बारे में बोलो, लेकिन फिर फैसला मेरा है के आना है के नहीं!" मैंने बोला, "मुझे फ़िक्र हो फिर भी फैसला तुम्हारा ही होगा? बताओ!!"'
'अब देखो! फैसला तो उसका ही होगा!'
'अरे तुम जाने दो अब! तुम तो agree करने लगी हो उससे! तुग़लक़ी चुड़ैल है वो.....तुग़लक़ी चुड़ैल ! हर बात में अपनी चॉइस ! हर फैसला खुद का!'
'उफ़्फ़! अपनी चॉइस! अपना फैसला! कितनी खराब बात है! है न?'
'हाँ! बस ये ही बात हो तो कोई सह भी ले। मैंने बात को संभालते हुए कहा "अरे मुझे तो बड़ा ही अच्छा लगता है तुम्हारा दूर मुझसे मिलने आना। मैं तो बस यूं ही न कर रहा था!" '
'खुश हो गई फिर?'
'बहुत ही! चहकते हुए बोली, "मुझे तो पहले ही पता था! मर्दों के न में अक्सर हाँ छुपी होती है!" '
'हाहाहाहा '
'😏😏😏'

You know kaha jata hai ki ek baar jojo chud chipak jaye toh chhodti nai hai.😂😂😂🤣🤣
ReplyDeleteसही !! और चिपकने के मामले में मैंने मर्द और औरत दोनों वैरायटी के चुड़ैल देखे है!
Delete😆😆😆😆😆
ReplyDeleteSahi kaha didi... Na mein haa chhupi hoti hai mardon ke...🤣😝
ReplyDelete(Shweta)
Bas! Ye jo tum jaan gayi ho na Shweta, bas koyi High Court judge jaan le toh maza hi aa jaye! ;) (Sarcasm alert!)
DeleteI love the chudail, btw. Left Right centre thukli becharake 😆
ReplyDeleteI have a feeling he also loves the chudail ;) pata hai na..mardo ke na me hi haaN hai
DeleteSeems he is fond of this tughlaki chudail.... 😆😆😆😆
ReplyDelete😄😄😄
Deleteये तुगलक की चुड़ैल है बहुत समझदार है। वरना लड़की की ना मे हाँ बताने वाले मर्द आज खुद हाँ मे ना छुपा के बात कर रहा था।
ReplyDelete(मैं तो बस यूं ही न कर रहा था) - पकड़े गया जनाब।। अब देखिये ये चुड़ैल.. क्या क्या Norms तोड़ेंगी। ☺
यथास्थिति को न बदले तो ये तुग़लकी कैसे कहलाएगी? अपने नाम की कुछ तो फ़िक्र होगा न इसे? 😆
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