Skip to main content

भूलक्कड़ी

"अरे क्या सब आजकल करती हो न तुम! बहुत ही ख़राब है ये!" 

"क्यों? मैंने क्या किया?" 

"अरे कल जो हम सेंटर गए थे, मेरा चार्जर लाना याद दिलाया तुमने? चार्जिंग पॉइंट पर लगा हुआ था न?" 

"मुझे बोलना था? ओह हो! फिर तो बड़ी गलती हो गयी मुहसे! हाथ जोड़ने लायक गलती!"
PC: Google

"और नहीं तो क्या! अब बताओ! जाना पड़ेगा मुझे एकदिन वापस लाने!"

"हाय! मेरी वजह से तुम्हे कितनी तकलीफ होगी! सिर्फ मेरी वजह से.... "

"और नहीं तो क्या? हसो मत! तुम्हे अगर याद रहता के मुझे कुछ याद नहीं रहता तो इतना कुछ करना नहीं पड़ता!" 

"हाँ यार! मैं दिन ब दिन बहुत ही भूलक्कड़ बनती जा रही हूँ!"

"वैसे उम्र भी तो हो रहा है!" 

"बहुत शुक्रिया इतने कन्सिडरेट बनने के लिए! हम वैसे एक ही उम्र के है!" 

"क्या बात करती हो! मैं तुमसे पूरा दश महीना छोटा हूँ! खुद बुढ़िया हो रही हो तो मुझे भी बना दो बस! ये सब चाल मुझे खूब पता है! मैं बूढ़ा नहीं होने वाला तुम्हारे साथ!"

"उफ़! माफ़ कर दो मुझे! ऐसी गलती फिर नहीं होगी!"

"माफ़ तो कर ही दिया! बेहद बड़े दिल का मालिक हूँ मैं!" 

"आह! Thank you! जैसे एक बोझ सा उतर गया दिल से!" 

"हाँ! ठीक है! लेकिन अगली बार भूलना नहीं के मै भूल सकता हूँ!" 

Comments

Popular posts from this blog

तुम, मैं, और पंज-पाइपर!

"कँहा जा रही हो तुम?" "पंजाब" "देखना!! किसी पंजाबी मुंडे दे नाल भाग मत जाना!" "अरे! इरादा तो वही था! तुम्हे कैसे पता चल गया? जिगरी हो तुम सच्ची!" "तुम्हारे रग रग से वाकिफ़ हूँ मै बंगालन!!" "अच्छा टाइटल है वैसे.. बंगालन भागी पंजाबी के साथ!! नही? " "हाँ हाँ क्यों नहीं? करो फिर ऐसा ही कुछ! बहुत मज़ा आएगा! क्या स्कैंडल होगा! वाह वाह!!"  "फिर खूब जमेगा रंग जब मिल बैठेंगे तीन यार - तुम, मैं, और पंज-पाइपर!!" 

अंदर की बात!

"सुनो! तुम्हारा पति कंसलटेंट है न? मुझे जॉब देने बोलो!"  "हममम सॉरी! आपकी जानकारी काफी पुरानी है। मेरा बहुत सालों से कोई पति नहीं है! वैसे सच पूछिए तो "पति" तो कभी कोई नहीं था।  मेरे पे मिलकियत कभी किसी की नहीं रही!!"  "अरे तुम फेमिनिस्ट टाइप्स भी न! मिलकियत छोड़ो! ये बताओ, उसने तुम्हे क्यों छोड़ दिया?" "अच्छा!! छोड़ देना ज़रूरी है क्या? अलग नहीं हो सकते?"  "अरे ऐसे कैसे! कुछ तो हुआ होगा!"  "जिस दिन क़िस्सा-गोई का मन बनाउंगी सबसे पहले आप को ही बताउंगी! फर्स्ट रौ में सीट ले लेना आप!"  "अरे कुछ  तो  बताओ! अंदर की बात! शर्माती क्यों हो? ऐसे और बहुत से क़िस्से मैं जानती हूँ! Let's discuss!"  "अच्छा?! ऐसा है क्या? Actually क्या बताऊँ!  बहुत ही unreasonable था वो ! बस एक दिन मैं शराब पी कर आयी और गुस्से में एक चांटा लगाया। एक ही! कसम से।  बस!! इतने से बात पर चला गया छोड़कर!! इतने से कोई जाता है क्या? आप ही बताइये! शादी के बाद ये घर ही उसका अपना घर था न? पर चला गया! क्या ज़माना आ गया है...

चोर का इमोशन होता है, पर चुड़ैल का?

"अब मान भी लो!"  "क्या?"  "ये काम तुम्हारा ही है न?" "कौन सा?" "ये फ़ोन गायब होना?" "अरे! मै दूसरे शहर में हूँ! मेरा काम कैसे होगा?"  "सच बताओ!" "नहीं भाई! मानती हूँ के मुझे ही फ़ोन न करो तो फ़ोन की तुम्हे ज़रुरत क्या है, ऐसा लगा था मुझे......"  "वही तो!  अब छुपाओ मत! राज़ खुल गया! ये सब वही है।  तंतर मंतर जादू टोना! अब तो साबित  ही हो गया के तुम ही वो बंगाली चुड़ैल हो जिससे हम बिचारे हिंदी प्रदेश के लोग सदियों से डरते आये है!"  "सदियों से?" "हाँ! हाँ! सदियों से!"  "अच्छा! और ये नहीं सीखाया गया हिंदी प्रदेश के लोगों को के अंधे को अंधा, बहरे को बहरा , चुड़ैल को चुड़ैल नहीं बोलते?"  "नाह! हमे सिर्फ सिखाया गया है के चोर को चोर नहीं, चौकीदार बोलते है! चोर का भी इमोशन होता है आखिर!!"