"वैसे चेक किया था तुमने? रेस्टोरेंट खुला होगा रात को?"
"बोला तो था, फ़ोन किया था उन्हें! पढ़ती नहीं हो तुम मेरा मैसेज!"
"ओह हो! पकड़ी गई क्या?"
"देखो! आज पकड़ लिया! वैसे शक तो मुझे पहले से ही था!"
"बिलकुल सही पकड़ा तुमने! एकदम सच बताऊं ? पढ़ती तो मैं कभी भी नहीं हूँ! बस आज पकड़ी गई!"
"दुखी कर देती हो तुम!"
"अरे अरे! दुखी क्यों होते हो? फिर नहीं पकड़ी जायूँगी!"
"पक्का?"
"पक्का!!! प्रॉमिस!"
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| Being high is like... |
"ओह हो! पकड़ी गई क्या?"
"देखो! आज पकड़ लिया! वैसे शक तो मुझे पहले से ही था!"
"बिलकुल सही पकड़ा तुमने! एकदम सच बताऊं ? पढ़ती तो मैं कभी भी नहीं हूँ! बस आज पकड़ी गई!"
"दुखी कर देती हो तुम!"
"अरे अरे! दुखी क्यों होते हो? फिर नहीं पकड़ी जायूँगी!"
"पक्का?"
"पक्का!!! प्रॉमिस!"

Padhti hoon main...pukka.. ��
ReplyDeleteBy the way, its fun to read these crisp conversations.
Mujhe ye toh pata hai janeman!
Deleteमैंने पोस्ट पढ़ ली हैं।।पक्का पढ़ ली है। आप कमेंट पक्का पढ़ लेना ।। पक्का।।
ReplyDeletePakka!!
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