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देश में निकला होगा चाँद


"चाँद चुराके लाया हूँ .. ला ला ला " 

"यह अजीब से लोगोके फोटोज क्यों भेजा जा रहा है मुझे?"

"अरे अरे! रेसिस्ट हो तुम! चाँद देखना चाहती थी तुम दूर देश से। भेजा तभी तो! तो यह लोग भी किसी न किसी का चाँद है!"

"होंगे! उससे मुझे क्या! और इसमें रेसिस्ट क्या है!"

"अच्छा रेसिस्ट न सही क्लासिस्ट तो है ही! नही तो भड़क क्यों जाती ऐसे? बता दूँ इनको के इनके चाँद होने से तुम्हे इंकार है?"

"पूरी बात बताना! बोलना, 'भाईसाब! ये मुझे प्यार से कभी कभी चाँद बुलाती है (मेरे शक्ल पे मत जाईए! प्यार अँधा होता है)! दूर देश में है और फोटो मंगवाया था चाँद का! मैंने आपलोगो का भेजा। बोला, आप में से किसीको भी चाँद मान लिया जाये, तो भड़क गई!'  फिर देखो क्या बोलते है यह लोग!"

"तुम भी ना! अब इतनी बातें कौन करे अनजान लोगों से! तुम तो जानते ही हो मैं  ज्यादा बातें करता नहीं!  ये लोग खुद ही बाकि समझ लेंगे! वो कहते है ना, मिसरा शायर का है और कैफियत अपनी अपनी!"

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