"अब मान भी लो!" "क्या?" "ये काम तुम्हारा ही है न?" "कौन सा?" "ये फ़ोन गायब होना?" "अरे! मै दूसरे शहर में हूँ! मेरा काम कैसे होगा?" "सच बताओ!" "नहीं भाई! मानती हूँ के मुझे ही फ़ोन न करो तो फ़ोन की तुम्हे ज़रुरत क्या है, ऐसा लगा था मुझे......" "वही तो! अब छुपाओ मत! राज़ खुल गया! ये सब वही है। तंतर मंतर जादू टोना! अब तो साबित ही हो गया के तुम ही वो बंगाली चुड़ैल हो जिससे हम बिचारे हिंदी प्रदेश के लोग सदियों से डरते आये है!" "सदियों से?" "हाँ! हाँ! सदियों से!" "अच्छा! और ये नहीं सीखाया गया हिंदी प्रदेश के लोगों को के अंधे को अंधा, बहरे को बहरा , चुड़ैल को चुड़ैल नहीं बोलते?" "नाह! हमे सिर्फ सिखाया गया है के चोर को चोर नहीं, चौकीदार बोलते है! चोर का भी इमोशन होता है आखिर!!"
सच्ची??? क्या सब कुछ ज़्यादा?
ReplyDeleteअब सोशल नॉर्म देखो तो ऐसा ही है!
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