"दूसरे तरफ क्यूँ देख रही हो?"
"ऑफ़ हो! गाना अभी ख़तम होने ही वाला था! ज़रा सब्र नहीं है!"

"क्या मतलब? मेरे आ जाने के बाद भी गाना चालू रखा?"
"हां! क्यों नहीं ? बोला न, गाना ख़तम होने ही वाला था। "
"शर्म करो! शर्म तो औरत का गहना होता है!"
"अरे गहने तो कब के बेच दिए जानेमन! वरना दुनिया कैसे देखती?"
"वाह वाह!! क्या बात की है! ये तुम्हारा तक़िया कलाम है?"
"अरे नहीं! ताज़ा परोसा। लुत्फ़ उठालो! चावल भले ही पुराना ख़िलाऊ तुम्हे, बातें हमेशा फ्रेश!" "बद्तमीज़ हो तुम!"
"हाँ! बद्तमीज़, बेबाक, और बेशरम भी!"
Hai re mard, ek besharam aurat na sambhali ja sakti tumse.
ReplyDeleteHahaha.. Nah bilkul nahi!
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ReplyDeleteनयना ने बेचे गहने।।
ReplyDeleteआओ शर्म के फेंके गहने।।
चलो नये ख्यालात पहने।
चलो बेशर्म बन के घूमने।।।