"क्या यार! ये सब शायरी मत सुनाओ! अब जब लहू आंख से बहने लगा है, तुम कहते हो कि काला चश्मा पहना करो, जचता है? वारिस शाह, बाहू के बाद कहाँ ये चवन्नी छाप शायर न चलेंगे!"
"वाह वाह! ग़ज़ब की लफ़्फ़ाज़ी है मियां ...... लाज रख लिया तुमने मेरा!"
"तुम हल्के में मत लो मुझे!"
"वही देख रही हूँ मैं! नहीं ले सकती"
"लहू वाक़ई आँखों से टपकेगा एक दिन! उसी लहू के दीये जलायोगी तुम! चिराग-ए -अश्क़"
"ओय होए! और फिर दास्तानगोई होगी। उस दीये के सामने बैठ कर। एक था ये और एक थी वो!"
"लफ़्फ़ाज़ी में माहिर! हाज़िर-जवाब जोड़ी! इनका कोई ब्रांच न था ! न होगा!"
"वैसे अच्छे भले थे दोनों! सनकी! सही से सठिया रहे थे। चालीस के उस पार के लोग अक्सर जैसे होते है! फिर अचानक एक दिन मिल गए ग़ालिब को गरियाते पुरानी दिल्ली की किसी गली में!"
"ये था निहायती निकम्मा ! जिसे मिलते ही इश्क़ हो चला था.. एक बंगालन से!"
"वही बंगालन! जैसी होती हैं वो ! जादू टोना वाली! तंतर मंतर बाँये हाथ का खेल!"
"हाँ यार! कहते थे बंगाल के किसी छोटे से शहर की रहने वाली थी चुड़ैल! बड़े कारनामे कर आयी थी वहां! लोग अभी भी याद करते है!"
" मन भर गया तो आ गयी दिल्ली!"
"नहीं नहीं! पकड़ी गयी तो आ गयी दिल्ली! और वहां मिले शेख जी चिल्ली! यानि अपना ये! लफ़्फ़ाज़ी, लेकिन भोला बेचारा! जैसे होते हैं, अपने दिल्ली के लौंडे!"
"वो चेहरे से हूर.... बिल्कुल भी नहीं थी!"
"(रुको तुम! कहानी ख़त्म होने दो! बताती हूँ!) .... फिर?"
"फिर क्या! फिर भी निगल गयी वो इसको! जब निकला तो आधी उम्र गवा के निकला! अच्छा खासा भारी सीरियस चालीस का मर्द, बीस के लड़के जैसा फ़रफ़राने लगा!"
"अब चुड़ैल की दलील कुछ और है! कहती हैं, 'बेचारा मर रहा था! मैंने तो जान फूंकी है उस में!'"
"कैसी जान ! बोलती बंद है लौंडे की! इशारों पर चलता हैं चुड़ैल के!"
"शेखजी हामी तो भरते हैं चुड़ैल के जान फूंकने वाली बात पर! लेकिन आप तो समझ ही गए न .. ये वही है! तंतर मन्तर, जादू टोना!"
"निहारी खिला के उल्लू बना दिया चुड़ैल ने! खबर यह भी है कि चुड़ैल ने उस शाम चुपके से चूरन मिलाया था निहारी में!"
"हाय! हाय! सच?"
"हाँ! वरना अपना लौंडा सख़्त था! ऐसे थोड़े ही पिघलता!"
"क्या ज़माना आ गया! अब लड़के शाम को अकेले निकल भी नहीं सकते!"
"हाँ यार! चूरन और पूर्वी हवा बहुत ही खतरनाक होते है !!"
Phir Wahi Baatein Leke Geet Koi Hum Likhe
ReplyDeleteJo Dil Ko Haan Sab Ke Dil Ko Chu Le.
Yeh tumhari meri baatein hamesha yuhi chalti rahe
Shukriya!
Deleteलहू के दीये... waah... lady Ghalib!
ReplyDeleteDeeye toh kisi aur ke lahoo ke jelenge Sudeshna di! Lady Ghalib toh dastangoyi karegi
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